राजस्थान में सूखे की मार: 2738 में से 2460 गांव अकालग्रस्त, बाजरा और ग्वार की फसल को भारी नुकसान
राजस्थान में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 2738 गांवों में से 2460 गांव अकालग्रस्त बताए गए हैं। बारिश के अभाव में खरीफ की फसलों पर बुरा असर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, बाजरा उत्पादन में 6 लाख 62 हजार क्विंटल और ग्वार उत्पादन में करीब 5 लाख क्विंटल का नुकसान हुआ है। फसल उत्पादन में आई इस गिरावट से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बारिश की कमी से खरीफ फसलों को नुकसान
राजस्थान के कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी खरीफ की फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई। बाजरा और ग्वार राज्य की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल हैं। इनकी खेती बड़ी संख्या में किसान करते हैं। ऐसे में बारिश की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
बाजरे की फसल को पानी की जरूरत के अहम चरणों में पर्याप्त नमी नहीं मिलने से दाने बनने और फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है। वहीं, ग्वार की फसल भी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से प्रभावित हुई है। इससे किसानों को अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने की स्थिति बन रही है।
2460 गांवों में अकाल जैसे हालात
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 2738 गांवों में से 2460 गांव अकालग्रस्त बताए गए हैं। यह संख्या बताती है कि बारिश की कमी का असर बड़े क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खेती पर निर्भर परिवारों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
फसल खराब होने या उत्पादन घटने से किसानों की आमदनी कम हो सकती है। इसके साथ ही बीज, खाद, कीटनाशक, जुताई और सिंचाई पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है। हालांकि, गांववार नुकसान और प्रभावित किसानों की संख्या के विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
बाजरा और ग्वार उत्पादन में बड़ी गिरावट
अनुमान के मुताबिक, बारिश के अभाव में बाजरा उत्पादन को 6 लाख 62 हजार क्विंटल का नुकसान हुआ है। वहीं, ग्वार उत्पादन में करीब 5 लाख क्विंटल की कमी बताई गई है। दोनों फसलों को मिलाकर नुकसान का आंकड़ा लगभग 11 लाख 62 हजार क्विंटल बैठता है।
उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट का असर किसानों की बिक्री और कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, इस नुकसान का आर्थिक मूल्य फसलों के बाजार भाव और वास्तविक उत्पादन के आकलन के आधार पर ही तय किया जा सकेगा।
किसानों को राहत की उम्मीद
अकाल जैसे हालात में प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए फसल नुकसान का सर्वे, पात्रता का आकलन और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता महत्वपूर्ण हो जाती है। किसानों को मुआवजा या अन्य राहत मिलेगी या नहीं, यह संबंधित सरकारी आकलन और लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, बारिश की कमी से बाजरा और ग्वार उत्पादन को हुए नुकसान के आंकड़े कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी चुनौती को उजागर करते हैं। प्रभावित गांवों और किसानों को राहत देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।