राजस्थान पंचायत चुनाव पर फिर संशय, वीडियो में जाने 31 जुलाई तक मतदान होगा या टलेगा? आरक्षण रिपोर्ट बनी सबसे बड़ी चुनौती
राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या एक बार फिर टल जाएंगे, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण चुनाव कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सबकी नजर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर टिकी है, जिसे 20 जून तक सौंपा जाना है।
20 जून की रिपोर्ट पर टिकी चुनाव की राह
पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक आंकड़ों और सिफारिशों की रिपोर्ट अभी तक अंतिम रूप में सामने नहीं आई है। यदि ओबीसी आयोग 20 जून तक आरक्षण संबंधी डेटा उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों को लेकर समयबद्ध प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन आरक्षण संबंधी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अभी तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं हो सकी है।
राज्य निर्वाचन आयोग के सामने दो विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग के सामने फिलहाल दो प्रमुख विकल्प मौजूद हैं।
पहला विकल्प:
सुप्रीम कोर्ट के मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव मामले में दिए गए फैसले को आधार बनाते हुए बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया जाए।
दूसरा विकल्प:
यदि आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो समय सीमा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाए और अतिरिक्त समय की मांग की जाए।
बिना आरक्षण चुनाव कराने पर भी बहस
बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव कराने का विकल्प कानूनी रूप से संभव माना जा रहा है, क्योंकि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में ऐसी व्यवस्था के तहत चुनाव कराने की अनुमति दी थी। हालांकि इस कदम के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चुनाव टलने की आशंका बरकरार
यदि आयोग निर्धारित समय में आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता और अदालत से राहत भी नहीं मिलती, तो पंचायत चुनावों के कार्यक्रम में देरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।