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भीलवाड़ा में शिक्षकों की ड्यूटी पर विवाद, 76 शारीरिक शिक्षकों को खेल आयोजन में लगाया

 

भीलवाड़ा जिले में एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ‘प्रवेशोत्सव’ के जरिए विद्यार्थियों के भविष्य की नींव रखने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग का एक आदेश विवाद का कारण बन गया है। भीलवाड़ा में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) की ओर से जारी आदेश के तहत शारीरिक शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर खेल गतिविधियों में ड्यूटी पर लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार, रेंज स्तरीय पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजन के लिए जिले के 76 शारीरिक शिक्षकों की ड्यूटी निर्धारित की गई है। इस फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है और इसे शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बताया है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही शिक्षकों को स्कूलों से हटाना विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डालेगा। खासकर शारीरिक शिक्षकों की भूमिका खेल के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में उन्हें इस प्रकार की ड्यूटी पर लगाना उचित नहीं है।

वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि इस तरह के आयोजन राज्य और विभागीय स्तर पर आवश्यक होते हैं, और इनमें शारीरिक शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु यह कदम उठाया गया है।

इस आदेश के विरोध में कई शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताते हुए विभाग से आदेश को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

मामला तूल पकड़ने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग इस विवाद को कैसे सुलझाता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा खेल गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।

कुल मिलाकर, भीलवाड़ा में यह आदेश शिक्षा और खेल के बीच टकराव का कारण बन गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है।