भरतपुर बिहारी जी मंदिर में हीरा विवाद गहराया, दानदाता ने कहा- मूर्ति में लगा रत्न मेरा दान किया हुआ नहीं
भरतपुर किले स्थित प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर से जुड़े हीरा चोरी के मामले में जांच तेज हो गई है। शनिवार को देवस्थान विभाग के उप शासन सचिव मंदिर पहुंचे और उनकी मौजूदगी में बिहारी जी की मूर्ति पर लगे हीरे को निकलवाकर दानदाता को दिखाया गया। हालांकि, दानदाता ने दावा किया कि मूर्ति पर लगा रत्न वह नहीं है, जिसे उन्होंने मंदिर में दान किया था।
दानदाता ने हीरे की पहचान से किया इनकार
जांच के दौरान जब मूर्ति से निकाले गए हीरे को दानदाता के सामने पेश किया गया तो उन्होंने इसे पहचानने से इनकार कर दिया। दानदाता का कहना है कि उन्होंने जो हीरा भगवान बिहारी जी को अर्पित किया था, यह वह रत्न नहीं है।
दानदाता के इस बयान के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और अब यह जांच का विषय बन गया है कि आखिर मूर्ति में लगा हीरा बदला गया है या किसी अन्य कारण से भ्रम की स्थिति बनी है।
अधिकारियों और पुजारियों की मौजूदगी में हुई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के दौरान भरतपुर देवस्थान विभाग के अधिकारी, मंदिर के दोनों पुजारी और दानदाता को भी मौके पर बुलाया गया। सभी की मौजूदगी में मूर्ति पर लगे रत्न को निकलवाकर उसकी जांच प्रक्रिया पूरी की गई।
असली या नकली, अभी नहीं हुआ खुलासा
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मूर्ति पर लगा हीरा असली है या नकली। इसकी पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी। देवस्थान विभाग अब रत्न की गुणवत्ता और उसकी वास्तविकता की जांच कराने की तैयारी कर रहा है।
जांच में जुटा देवस्थान विभाग
देवस्थान विभाग पूरे मामले के हर पहलू की जांच कर रहा है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मंदिर में चढ़ाए गए हीरे के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या नहीं। साथ ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
श्रद्धालुओं में चर्चा का विषय
बिहारी जी मंदिर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में भी चर्चा तेज हो गई है। लोग पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की नजर विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट और देवस्थान विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।