राजस्थान में भक्ति की उमंग, फुटेज में देंखे धूमधाम से निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्राएं; उदयपुर में 95 किलो चांदी के रथ पर विराजे प्रभु
राजस्थान के विभिन्न शहरों में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्राएं श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गईं। जयकारों, भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। जयपुर, उदयपुर समेत कई शहर भक्तिमय माहौल में रंगे नजर आए।
उदयपुर में निकली राजस्थान की सबसे बड़ी रथयात्रा
उदयपुर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर से राजस्थान की सबसे बड़ी और देश की तीसरी सबसे बड़ी भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई। इस दौरान भगवान जगन्नाथ स्वामी 95 किलो चांदी से बने भव्य रथ पर मां लक्ष्मी और दानीराय जी के साथ नगर भ्रमण पर निकले।रथयात्रा शुरू होने से पहले भगवान को 21 बंदूकों की सलामी दी गई, जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी।
375 साल पुराने लकड़ी के रथ की ऐतिहासिक वापसी
इस वर्ष की रथयात्रा की सबसे खास बात यह रही कि जगदीश मंदिर की स्थापना के बाद पहली बार 375 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ को भी यात्रा में शामिल किया गया। इस ऐतिहासिक रथ पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी (युगल सरकार) विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते नजर आए।इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहे।
जयपुर में पुरी की तर्ज पर निकली भव्य यात्रा
राजधानी जयपुर में जगन्नाथ सेवक समिति की ओर से पुरी (ओडिशा) की परंपरा के अनुरूप भव्य रथयात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा गोविंद देवजी मंदिर से शुरू हुई, जिसमें भगवान जगन्नाथ 25 फीट ऊंचे रथ पर विराजमान हुए।वहीं, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा 12-12 फीट ऊंचे अलग-अलग रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ खींचा और भगवान के जयकारे लगाए।
हाइड्रोलिक रथ बना आकर्षण का केंद्र
जयपुर के गुप्त वृंदावन धाम में भी भगवान जगन्नाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यहां पहली बार आधुनिक हाइड्रोलिक रथ का उपयोग किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।रथ को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया था। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
हर ओर गूंजे 'जय जगन्नाथ' के जयकारे
रथयात्राओं के दौरान पूरे प्रदेश में धार्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हुए। कई सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत और प्रसाद की व्यवस्था भी की।प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की थी ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष भी राजस्थान के विभिन्न शहरों में निकली भव्य यात्राओं ने श्रद्धा और परंपरा की अद्भुत झलक पेश की।