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अमौसा मेले से लौटते श्रद्धालु, चेहरे पर संतुष्टि और पुण्य की अनुभूति

 

सोमवार को आयोजित मौनी अमावस्या के अवसर पर अमौसा मेला (माघ मेला) समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं की वापसी का दृश्य बेहद मनमोहक रहा। मेले में लौटते हुए लोग अपने सिर पर गठरी, हाथों में झोला लिए, बच्चों को गोद में उठाए, बुजुर्गों का हाथ पकड़े और पूरे परिवार के साथ लौटते दिखाई दिए।

श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतुष्टि और पुण्य की अनुभूति साफ देखी जा रही थी। मौनी अमावस्या पर पवित्र डुबकी लगाने के बाद लोग आस्था और आध्यात्मिक आनंद से लबरेज होकर अपने-अपने घरों की ओर लौट रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन स्नान करने और श्रद्धा-अनुष्ठान करने से आध्यात्मिक लाभ और मानसिक शांति मिलती है।

मेले में शामिल लोग मुख्य रूप से स्थानीय क्षेत्र और आसपास के जिलों से आए थे। उन्होंने अमौसा मेला में पूजा, स्नान और धार्मिक अनुष्ठान कर पुण्य अर्जित किया। कई लोग बच्चों और बुजुर्गों के साथ आए थे, ताकि पूरे परिवार के लिए यह धार्मिक अनुभव यादगार बन सके।

वापसी मार्गों पर श्रद्धालु बहुत ही संयम और अनुशासन के साथ अपने-अपने घरों की ओर बढ़ रहे थे। पीपा पुलों और संकरी गलियों में भीड़ के बावजूद श्रद्धालु सहजता से आगे बढ़ते दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान रखा गया, जिससे किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।

स्थानीय व्यापारी और दुकानदार भी मेले के दौरान उत्साह और भक्तिभाव से भरे श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर व्यापार और धार्मिक उत्सव दोनों का संगम देखने को मिला। मेले की रौनक और आस्था ने पूरे इलाके का वातावरण आध्यात्मिक बना दिया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि मौनी अमावस्या का मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का भी प्रतीक है। यहां लोग अपने परिवार और समाज के साथ मिलकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान और पूजा करने से धार्मिक आस्था मजबूत होती है और मानसिक शांति मिलती है। यह अवसर लोगों को अपने जीवन में संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ता है।

इस प्रकार, सोमवार को अमौसा मेला से लौटते श्रद्धालुओं का दृश्य आध्यात्मिक आनंद और संतुष्टि की कहानी कहता है। सिर पर गठरी, हाथ में झोला, बच्चों को गोद में उठाए, बुजुर्गों का हाथ पकड़े लोग इस दिन की धार्मिक पवित्रता और पुण्य की अनुभूति के साथ घर लौटे। प्रशासन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के सहयोग से यह मेला सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुआ।