इंदिरा गांधी नहर का नाम बदलने की मांग, ‘गंग नहर’ रखने की उठी आवाज
इंदिरा गांधी नहर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। हाल ही में खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न किए जाने के बाद अब देश में ऐतिहासिक और विकास परियोजनाओं के नाम बदलने की मांगें उठने लगी हैं। इसी क्रम में भारतीय जन महासभा ने इंदिरा गांधी नहर का नाम बदलकर फिर से “गंग नहर” रखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस नहर की शुरुआती नींव और विचार “गंग नहर” के रूप में विकसित हुआ था, इसलिए इसे उसी मूल नाम से जाना जाना चाहिए।
इंदिरा गांधी नहर, जिसे पहले “राजस्थान नहर परियोजना” के नाम से शुरू किया गया था, राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इस नहर ने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जैसे क्षेत्रों में पानी पहुंचाकर कृषि और जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। यह परियोजना वर्ष 1958 में शुरू हुई थी और बाद में वर्ष 1984 में इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी के नाम पर रख दिया गया। तब से यह इसी नाम से जानी जाती है।
मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि ऐतिहासिक और मूल योगदान को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं के नामों पर पुनर्विचार होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कई लोग मानते हैं कि इंदिरा गांधी नहर ने राजस्थान की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है और यह नाम देशभर में पहचान बना चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने की बहस अक्सर ऐतिहासिक भावनाओं, राजनीतिक दृष्टिकोण और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ी होती है। हालांकि, जमीनी स्तर पर लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नहर आज भी रेगिस्तान में जीवन और पानी की सबसे बड़ी आधार बनी हुई है। फिलहाल यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और आने वाले समय में इस पर और बहस तेज होने की संभावना है।