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जैसलमेर में खुले में पड़े मिले मृत गोवंश के शव, वायरल वीडियो से मचा बवाल; नगर परिषद और ठेकेदार पर उठे सवाल

 

राजस्थान के Jaisalmer में स्थित बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में मृत गोवंश के शव खुले में पड़े मिलने का मामला सामने आने के बाद भारी आक्रोश फैल गया है। इस घटना ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली, स्वच्छता व्यवस्था और गोसंरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और नगर परिषद को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार, बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में कई मृत गोवंश के शव खुले में पड़े हुए थे। शवों के आसपास गंदगी और बदबू का माहौल बना हुआ था, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद और संबंधित ठेकेदार की लापरवाही के कारण मृत पशुओं का समय पर निस्तारण नहीं किया गया। इससे न केवल स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी। स्थानीय सामाजिक संगठनों और गौसेवा से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन एक तरफ गोसंरक्षण के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह फेल नजर आ रही हैं।

मामले ने तूल पकड़ा तो नगर परिषद हरकत में आई। परिषद की ओर से संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डंपिंग यार्ड की सफाई और मृत पशुओं के उचित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपिंग यार्ड में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं। समय पर सफाई नहीं होने और पशुओं के शवों का सही तरीके से निस्तारण नहीं किए जाने के कारण वहां बदबू और संक्रमण का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा सामने न आएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में मृत पशुओं के शव पड़े रहने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना बेहद जरूरी माना जाता है।

घटना के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं प्रशासन अब मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था सुधारने का दावा कर रहा है।

फिलहाल वायरल वीडियो ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है और अब लोगों की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।