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दौसा का रहस्य: छह साल बाद खुला मासूम की हत्या का मामला

 

राजस्थान के दौसा जिले में छह साल पहले हुए मासूम बच्चे के किडनैपिंग और हत्या का मामला अब भी लोगों के मन में डर और सवाल छोड़ रहा है। यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। पुलिस को इस रहस्य को सुलझाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा, और केस की गुत्थी को खोलने के लिए उन्होंने एक्सप्रेसवे अथॉरिटी और मौसम विभाग जैसी संस्थाओं की भी मदद ली।

मासूम के साथ हुई यह घटना लंबे समय तक पहेली बनी रही। पुलिस ने पूरे इलाके में जांच की, लोगों से पूछताछ की और तकनीकी सहायता का उपयोग किया, लेकिन आरोपी और शव का पता लगाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अंततः छह साल बाद कृष्णा और अनिल नामक दो आरोपियों की पहचान हुई, जो बच्चे के परिवार के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने ही बच्चे की हत्या की और शव को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के किनारे दफना दिया। लेकिन इस खुलासे के बावजूद, आज भी शव कंकड़-पत्थरों और मिट्टी के नीचे दबा हुआ है। पुलिस अब संदिग्ध स्थानों पर खुदाई कर रही है और शव को बरामद करने के लिए विशेष तकनीकी और मानवीय प्रयास जारी हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जटिलता के कारण कई वर्षों तक जांच लंबित रही। आरोपी ने वर्षों तक जांच से बचते हुए परिवार और समाज को भ्रमित किया। अब आरोपी की गिरफ्तारी और उनके दिए गए बयान से मामले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।

स्थानीय लोग और परिवार इस घटना से सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि इतने सालों तक न्याय की प्रतीक्षा करना और हर बार बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के डर में जीना बेहद कठिन रहा। एक्सप्रेस-वे पर चल रही खुदाई और जांच अब उन्हें न्याय की उम्मीद दे रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले केवल कानून और पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहते। यह समाज और परिवार के लिए मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी बन जाते हैं। इसलिए इस तरह के केस में तेज, निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

इस घटना ने दौसा जिले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और बच्चों की रक्षा को लेकर लोगों में चेतना और चिंता दोनों बढ़ा दी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी को कड़ी सजा मिले और मासूम के परिवार को न्याय मिल सके।

अंततः, दौसा का यह केस न केवल एक दुखद हत्याकांड है, बल्कि यह समाज के सामने सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही की चुनौती भी पेश करता है। छह साल बाद खुली इस गुत्थी ने यह दिखा दिया है कि चाहे मामला कितना भी जटिल क्यों न हो, सही तकनीक, कड़ी मेहनत और सबूतों के आधार पर अपराधियों तक पहुँच संभव है।