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यूडाइस पोर्टल पर डेटा गड़बड़ी: राजस्थान में लगभग पांच लाख छात्रों की स्थिति अज्ञात

 

राजस्थान में स्कूल शिक्षा के आंकड़ों के प्रबंधन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। राज्य के यूडाइस (UDISE) पोर्टल पर 2025-26 के शिक्षा सत्र के डेटा के अनुसार करीब पांच लाख छात्रों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, ये विद्यार्थी पोर्टल पर “ड्रॉप बॉक्स” में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन किसी भी स्कूल ने उनके रिकॉर्ड को इम्पोर्ट नहीं किया है। इससे राज्य में नामांकन और ड्रॉपआउट की वास्तविक संख्या का पता नहीं चल पा रहा है

शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि यूडाइस पोर्टल में यह गड़बड़ी मुख्य रूप से स्कूलों द्वारा डेटा अपलोड न करने के कारण हुई है। इससे न केवल छात्रों की संख्या का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है, बल्कि शिक्षा नीतियों और बजट आवंटन के लिए आवश्यक आंकड़ों की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस समस्या को सुधारने के लिए सभी स्कूलों को तुरंत अपने डेटा को पोर्टल में अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूडाइस जैसे पोर्टल शिक्षा प्रबंधन और नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं। यदि डेटा सही तरीके से अपडेट नहीं किया जाता है, तो न केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होता है, बल्कि बच्चों की शिक्षा में भी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। वे आगे कहते हैं कि ड्रॉपआउट की सही संख्या का पता लगाना आवश्यक है, ताकि राज्य स्तर पर छात्र-छात्राओं के लिए उपयुक्त योजनाएं बनाई जा सकें।

हालांकि, शिक्षा विभाग ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि यह गड़बड़ी “तकनीकी और प्रोसेस संबंधी” है और इसका छात्रों की शिक्षा या उनके नामांकन पर कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ा है। विभाग ने आश्वस्त किया कि जल्द ही सभी अनियमितताओं को सही कर दिया जाएगा और सभी छात्रों की स्थिति पोर्टल पर स्पष्ट दिखाई देगी।

गौरतलब है कि राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में यूडाइस पोर्टल पर डेटा एंट्री और अपडेट को लेकर कई बार समस्याएं सामने आ चुकी हैं। कई स्कूल तकनीकी कारणों या कर्मचारी कमियों के चलते समय पर डेटा अपलोड नहीं कर पाते हैं। इससे राज्य के शिक्षा आंकड़ों की विश्वसनीयता पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं।

शिक्षा अधिकार संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि छात्रों की संख्या और ड्रॉपआउट का सही आंकड़ा नहीं मिलेगा, तो कई योजनाओं और छात्रवृत्तियों का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वे सभी स्कूलों के डेटा की नियमित जांच और सत्यापन सुनिश्चित करें।

वर्तमान में शिक्षा विभाग ने सभी ज़िलों में निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों को अपने यूडाइस डेटा की समीक्षा करनी होगी और जितनी जल्दी हो सके डेटा को सही तरीके से पोर्टल पर अपलोड करना होगा। विभाग का दावा है कि अगले कुछ हफ्तों में पांच लाख छात्रों की स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी और शिक्षा सत्र 2025-26 के आंकड़े पूरी तरह से अपडेट हो जाएंगे।