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राजस्थान में फसल बीमा का बदला ट्रेंड: बीमा का दायरा घटा, लेकिन 5 साल में कंपनियों का प्रीमियम 5,888 करोड़ रुपए के पार

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लेकर राजस्थान में पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों ने एक अलग तस्वीर पेश की है। जहां एक ओर राज्य में फसल बीमा के तहत आने वाला कृषि क्षेत्र लगातार कम होता गया, वहीं दूसरी ओर बीमा कंपनियों को दिया जाने वाला प्रीमियम हर साल बढ़ता रहा। इससे योजना के क्रियान्वयन और लागत को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में राजस्थान में करीब 107 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र फसल बीमा के दायरे में था, जो घटकर अब करीब 101.50 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी पांच वर्षों में लगभग 5.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र फसल बीमा के दायरे से बाहर हो गया।

वहीं दूसरी ओर, बीमा कंपनियों को दिया जाने वाला प्रीमियम लगातार बढ़ा है। 2021 में जहां कुल प्रीमियम करीब 4,800 करोड़ रुपए था, वहीं अब यह बढ़कर 5,888 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। यानी बीमा क्षेत्र कम होने के बावजूद प्रीमियम में करीब 1,088 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम में वृद्धि के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें मौसम संबंधी जोखिम बढ़ना, फसलों का बीमांकिक मूल्य (सम इंश्योर्ड) बढ़ना, दावों का अनुभव, बीमा दरों में बदलाव और जोखिम आकलन जैसे कारक शामिल हैं। हालांकि, इन कारणों का विस्तृत विश्लेषण संबंधित विभाग और बीमा कंपनियों के आंकड़ों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि और अन्य जोखिमों से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे में यदि बीमा का दायरा लगातार घट रहा है तो इसके पीछे किसानों की भागीदारी, योजना की पहुंच और जागरूकता जैसे पहलुओं की भी समीक्षा की आवश्यकता है।

राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेते हैं। ऐसे में बीमा क्षेत्र में आई गिरावट और प्रीमियम में लगातार हो रही बढ़ोतरी नीति निर्माताओं और कृषि विभाग के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गई है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि योजना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए किसानों की भागीदारी बढ़ाने, समय पर दावा निपटान सुनिश्चित करने और प्रीमियम निर्धारण प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की आवश्यकता है। इससे किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा और योजना का वास्तविक उद्देश्य भी पूरा हो सकेगा।