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राजस्थान विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर विवाद, वीडियो में जाने पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल

 

राजस्थान विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी की गई इंटरव्यू सूची को लेकर अभ्यर्थियों और शिक्षाविदों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।

इंटरव्यू लिस्ट पर उठे सवाल

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विश्वविद्यालय की ओर से पीएचडी प्रवेश के लिए चयनित अभ्यर्थियों की इंटरव्यू सूची जारी की गई है, लेकिन इसमें आरक्षण के तहत विभिन्न वर्गों के अनुपात का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि किस आरक्षित वर्ग से कितने उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। इस अस्पष्टता के कारण पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

पारदर्शिता पर संदेह

शिक्षाविदों और छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंटरव्यू सूची तो जारी कर दी, लेकिन वर्गवार सीटों और चयन के मानकों को सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि अंतिम चयन प्रक्रिया में मनमानी की संभावना हो सकती है।

अभ्यर्थियों की नाराजगी बढ़ी

अभ्यर्थियों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है।

राज्यपाल और कोर्ट जाने की तैयारी

मामले से नाराज अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से शिकायत करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही वे इस मुद्दे को लेकर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन पर नजर

फिलहाल पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विवाद बढ़ने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पर क्या सफाई देता है और चयन प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाता है। इस विवाद ने एक बार फिर उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।