जोधपुर में युवा कांग्रेस की 'मनरेगा बचाओ पदयात्रा' में विवाद, विधायक ने ज्ञापन फाड़कर अधिकारी पर फेंका
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सियासी विवाद सामने आया है। जोधपुर में मंगलवार (20 जनवरी) को राजस्थान युवा कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘मनरेगा बचाओ महासंग्राम पदयात्रा’ के दौरान एक घटना ने लोगों का ध्यान खींचा।
सूत्रों के अनुसार, यह पदयात्रा सोजती गेट से शुरू होकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक चली। इस पदयात्रा का नेतृत्व संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया ने किया। पदयात्रा में पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी, भोपालगढ़ विधायक गीता बरवड़ और अन्य कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल थे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था मनरेगा योजना में उत्पन्न समस्याओं और मजदूरों के हितों की मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना। पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया।
इस दौरान जिला कलेक्टर ने अपने चैंबर से बाहर आकर प्रदर्शन स्थल पर ज्ञापन लेने का प्रयास किया। लेकिन यहाँ एक घटना ने माहौल गर्मा दिया। संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया ने ज्ञापन को फाड़ दिया और उसे राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और एसडीएम पंकज जैन के मुंह पर फेंक दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस घटना के बाद कार्यस्थल पर अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने शांत रहने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की, लेकिन कार्यकर्ताओं और विधायक की जिद के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
राजस्थान प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि कानून और प्रशासनिक मर्यादा के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और किसी भी दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना युवा कांग्रेस और प्रशासन के बीच टकराव का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएँ न केवल राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाती हैं, बल्कि सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर भी असर डालती हैं।
युवा कांग्रेस के नेताओं ने इस घटना के बाद कहा कि उनका उद्देश्य केवल मनरेगा के तहत मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और उनकी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में उग्रता की भावना नहीं थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये ने कार्यकर्ताओं को उत्तेजित कर दिया।
स्थानीय नागरिक और मीडिया इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो और घटना को लेकर भारी बहस और प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने विधायक के रवैये की आलोचना की, तो कई लोग इसे किसानों और मजदूरों के हित में सख्त कदम के रूप में देख रहे हैं।
इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि राजनीतिक प्रदर्शन और प्रशासनिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है। जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
इस प्रकार, जोधपुर में हुई यह घटना न केवल युवा कांग्रेस की मनरेगा बचाओ पदयात्रा को सुर्खियों में ला दी है, बल्कि यह प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच संपर्क और संवाद के महत्व को भी उजागर करती है।