स्कूलों में ‘पखवाड़ा’ को लेकर असमंजस, संस्था प्रधान बोले—“हमारे पास कोई आदेश ही नहीं आया”
शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे कथित ‘पखवाड़ा’ कार्यक्रम को लेकर जमीनी स्तर पर भारी असमंजस की स्थिति सामने आई है। कई स्कूलों और संस्था प्रधानों ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिना स्पष्ट निर्देशों के यह पखवाड़ा कैसे और किन स्तरों पर संचालित किया जा रहा है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामने आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, कई सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षक और प्रशासनिक स्टाफ इस कार्यक्रम को लेकर अनजान हैं। संस्था प्रधानों का कहना है कि विभागीय स्तर पर ऐसी किसी गतिविधि की कोई सूचना या सर्कुलर नहीं मिला, जिसके चलते वे इसे लागू करने में असमर्थ हैं।
आदेश के अभाव में स्कूलों में भ्रम
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि हर साल शिक्षा विभाग विभिन्न जागरूकता अभियानों और पखवाड़ों का आयोजन करता है, लेकिन इस बार स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने से स्थिति भ्रमित है। कई प्रधानाचार्यों ने बताया कि वे सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स या गैर-आधिकारिक माध्यमों से ही इस पखवाड़े के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
एक संस्था प्रधान ने कहा, “जब तक हमें लिखित आदेश नहीं मिलता, हम किसी भी गतिविधि को आधिकारिक रूप से लागू नहीं कर सकते। हमारे पास तो कोई निर्देश ही नहीं आया है, फिर पखवाड़ा कैसे चलाएं?”
छात्रों की भागीदारी पर भी असर
आदेश और स्पष्ट दिशा-निर्देश के अभाव में छात्रों की भागीदारी भी प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में न तो विशेष कार्यक्रम आयोजित हो पा रहे हैं और न ही जागरूकता से जुड़े सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इससे कार्यक्रम का उद्देश्य भी अधूरा रह जाने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि जब किसी अभियान को पूरे राज्य में समान रूप से लागू करना होता है, तो उसके लिए समय पर और स्पष्ट संचार बेहद जरूरी होता है। लेकिन इस बार सूचना तंत्र में कमी के कारण स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
शिक्षा विभाग से प्रतिक्रिया का इंतजार
मामले को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि संबंधित आदेश जारी किए जा चुके हैं और जल्द ही सभी जिलों में इसकी पुष्टि कर दी जाएगी।
वहीं, कुछ अधिकारियों का यह भी मानना है कि तकनीकी या संचार संबंधी कारणों से कुछ स्कूलों तक आदेश नहीं पहुंच पाए होंगे, जिसे जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक संचार व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी राज्य स्तरीय कार्यक्रम की सफलता के लिए जरूरी है कि हर स्तर पर स्पष्ट और समयबद्ध सूचना पहुंचे, अन्यथा इसका असर सीधे कार्यान्वयन पर पड़ता है।