राजस्थान में बढ़ा आयुष उपचार का भरोसा, 81% परिवारों ने माना प्रभावी; आयुर्वेद बना पहली पसंद
इलाज को लेकर लोगों की सोच में बदलाव के बीच राजस्थान में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी आदि) तेजी से एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहा है। राज्य के पहले आयुष सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अब पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भरोसा कर रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 81.1 प्रतिशत परिवारों ने आयुष उपचार को प्रभावी माना है।
आयुर्वेद को सबसे ज्यादा पसंद किया गया
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने वाले 89 प्रतिशत मरीजों और बिना भर्ती इलाज कराने वाले 91 प्रतिशत मरीजों ने आयुर्वेद को अपनी पसंद बताया। इससे साफ है कि राजस्थान में आयुर्वेद लोगों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय आयुष पद्धति बनकर सामने आया है।
लोगों का मानना है कि आयुर्वेद में बीमारी के मूल कारणों पर ध्यान दिया जाता है और लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने में यह मददगार साबित हो सकता है।
योग और होम्योपैथी रहे किफायती विकल्प
सर्वे में इलाज के खर्च को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, योग और होम्योपैथी उपचार सबसे किफायती विकल्प साबित हुए। कम खर्च में स्वास्थ्य लाभ मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग इन पद्धतियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते इलाज खर्च के बीच कम लागत वाले विकल्प लोगों के लिए राहत का माध्यम बन रहे हैं।
बदल रही है लोगों की सोच
पहले जहां गंभीर बीमारियों के लिए लोग केवल आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर निर्भर रहते थे, वहीं अब कई लोग जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आयुष पद्धतियों को अपना रहे हैं।
योग, प्राकृतिक जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ने से इनकी स्वीकार्यता भी लगातार बढ़ रही है।
सरकार की योजनाओं से मिला बढ़ावा
राजस्थान में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और जागरूकता अभियानों का भी असर देखने को मिल रहा है। सरकार की ओर से आयुष अस्पतालों और केंद्रों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मिल सके।
विशेषज्ञों ने बताया संतुलित दृष्टिकोण जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आयुष पद्धतियां कई मामलों में उपयोगी साबित हो सकती हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों में डॉक्टर की सलाह और सही समय पर उपचार जरूरी है। आयुष और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय से मरीजों को अधिक लाभ मिल सकता है।
राजस्थान के पहले आयुष सर्वे के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राज्य में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियां अब स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में अपनी जगह बना रही हैं।