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CJP नेता दीपक बालियान को राजस्थान में हिरासत में लिए जाने का दावा, वीडियो में जाने पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

 

राजस्थान के अलवर जिले के कठूमर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संगठन सह प्रभारी दीपक बालियान को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि राजस्थान पुलिस बालियान को उनके आवास से लेकर पुलिस स्टेशन गई। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने पार्टी की ओर से लगाए गए अवैध हिरासत के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मामले को लेकर पुलिस और पार्टी के दावों में अंतर सामने आया है। दीपक बालियान को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी ने यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे को लेकर बुलाया है।

CJP ने सोशल मीडिया पर क्या दावा किया?

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CJP की ओर से X पर किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि राजस्थान पुलिस दीपक बालियान को कठूमर स्थित उनके घर से हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले गई। पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हिरासत के कारण और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक विवरण स्पष्ट नहीं है।दूसरी ओर, राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने पार्टी की ओर से लगाए गए गलत और अवैध हिरासत के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पुलिस बालियान को किस आधार पर ले गई थी और इस कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान

CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी के मुताबिक, प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है।पार्टी और उसके सहयोगी संगठन SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। इन संगठनों की मांग है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर नहीं किया जाए।हालांकि, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों और प्रक्रिया के वास्तविक प्रभाव का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित दस्तावेजों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

हिरासत की खबर से बढ़ी राजनीतिक हलचल

दीपक बालियान को हिरासत में लिए जाने का दावा ऐसे समय आया है, जब पार्टी दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। इस घटनाक्रम के बाद 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी ध्यान बढ़ गया है।फिलहाल, मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बालियान को पुलिस किस कानूनी आधार पर ले गई, क्या उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नहीं और पुलिस की ओर से इस संबंध में क्या आधिकारिक जानकारी दी जाती है।जब तक पुलिस की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती, तब तक हिरासत और अवैध कार्रवाई से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।