मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के स्वर्ण जयंती समारोह में की बात, आयुर्वेद को बढ़ावा देने का दिया संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (NIA) के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। समारोह में मुख्यमंत्री ने संस्थान की 50 साल की यात्रा और आयुर्वेद के महत्व पर जोर देते हुए कई अहम बातें साझा कीं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह संस्थान 1976 में केवल एक कॉलेज के रूप में स्थापित हुआ था, और आज यह देश के प्रमुख डीम्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालयों में शामिल है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की पहाड़ियां, जंगल और समृद्ध जैव विविधता यह दर्शाती हैं कि राज्य का आयुर्वेद से सदियों पुराना और गहरा संबंध रहा है।
भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने और इसे आम जनता के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने इस क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार आयुर्वेदिक उपचारों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ करने के लिए नई नीतियां और संसाधन उपलब्ध करा रही है। उनका कहना था कि पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ जोड़कर लोगों को स्वास्थ्य के बेहतर विकल्प प्रदान किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के समारोह और सरकारी समर्थन से आयुर्वेद की लोकप्रियता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ती हैं। समारोह में संस्थान के शिक्षक, छात्र और विभिन्न विशेषज्ञ भी मौजूद थे, जिन्होंने आयुर्वेद के शिक्षा और अनुसंधान में योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और जैविक विविधता का भी हिस्सा है। राज्य सरकार इसके संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में नए शोध, पाठ्यक्रम और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और तेजी से विकास की उम्मीद जताई जा रही है।