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राजस्थान में बस ऑपरेटर्स की हड़ताल जारी, पीएम मोदी की अजमेर रैली प्रभावित

 

राजस्थान में प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और राज्य सरकार के बीच चल रहे विवाद ने अब आर-पार की जंग का रूप ले लिया है। पिछले दिन से जारी हड़ताल के चलते प्रदेश की लगभग 35,000 स्लीपर, स्टेज कैरिज और लोक परिवहन बसें रूट पर नहीं चल रही हैं।

सरकार और बस ऑपरेटर्स के बीच हुई वार्ता बेनतीजा साबित हुई है। निजी बस संचालकों का कहना है कि परिवहन विभाग के कठोर नियम और भारी चालान, ओवरहैंग और परमिट उल्लंघनों को लेकर उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में वे बसों का संचालन नहीं कर सकते, और इसी कारण हड़ताल जारी रखी जा रही है।

इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर आगामी अजमेर में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली पर पड़ने वाला है। ऑपरेटर्स ने साफ कर दिया है कि रैली के लिए बसें उपलब्ध नहीं कराएंगे, जिससे बड़ी संख्या में आम जनता और समर्थकों की यात्रा प्रभावित होगी। इसके चलते प्रशासन को रैली स्थल तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था करनी पड़ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस हड़ताल से आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना लाखों लोग बसों के माध्यम से शिक्षा, नौकरी और व्यवसायिक कार्यों के लिए यात्रा करते हैं, और इस हड़ताल ने उनके लिए यात्रा संकट और असुविधा उत्पन्न कर दी है।

राज्य सरकार ने हड़ताल को जल्द समाप्त करने के लिए संचालकों से बार-बार वार्ता की कोशिश की, लेकिन निजी बस ऑपरेटर्स ने अपनी मांगों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। परिवहन विभाग का कहना है कि वे सभी वैधानिक नियमों का पालन कर रहे हैं और बस संचालकों को दिए गए सभी नोटिस कानूनी और न्यायसंगत हैं।

हड़ताल के कारण प्रदेश के बड़े शहरों जैसे जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा और बीकानेर में परिवहन बाधित हुआ है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे यात्रा के लिए वैकल्पिक साधन और निजी वाहन का उपयोग करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हड़ताल का जल्द समाधान न निकला तो आने वाले पर्यटन और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर गंभीर असर पड़ेगा। खासकर अजमेर में प्रधानमंत्री रैली जैसे बड़े आयोजन में लोगों की उपस्थिति और व्यवस्थापन को लेकर चुनौती बढ़ सकती है।

राजस्थान में यह विवाद यह दर्शाता है कि परिवहन नियम, निजी ऑपरेटर्स और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। सरकार और ऑपरेटर्स दोनों के लिए यह आवश्यक है कि साझा समझौते और कानूनी समाधान निकालकर हड़ताल को जल्द समाप्त किया जाए।

इस हड़ताल ने राज्य में यह स्पष्ट कर दिया है कि परिवहन क्षेत्र में नीति और नियमों की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, आम जनता और विशेष आयोजनों के लिए यातायात की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार और ऑपरेटर्स दोनों की जिम्मेदारी है।