बकरी फार्म के नाम पर सब्सिडी लेकर चलाए ईंट भट्टे और लोहे की चादर के कारखाने, विभाग ने शुरू की कार्रवाई
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत बकरी फार्म स्थापित करने के नाम पर सब्सिडी लेने और निर्धारित उद्देश्य के बजाय दूसरे कारोबार चलाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लाभार्थियों ने योजना के तहत आर्थिक सहायता लेकर बकरी फार्म शुरू करने के बजाय ईंटों के भट्टे और लोहे की चादर बनाने के कारखाने संचालित किए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
बकरी फार्म के नाम पर ली गई सब्सिडी
राष्ट्रीय पशुधन मिशन का उद्देश्य पशुपालन और पशुधन आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित दिशा-निर्देशों और शर्तों के अनुसार सहायता दी जाती है। बकरी पालन जैसे व्यवसायों को प्रोत्साहन देने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की उम्मीद की जाती है।
लेकिन इस मामले में आरोप है कि योजना के तहत बकरी फार्म स्थापित करने के लिए सब्सिडी लेने वाले कुछ लोगों ने इसका इस्तेमाल दूसरे कारोबार चलाने में किया। बकरी पालन के बजाय ईंटों के भट्टे और लोहे की चादर बनाने वाले कारखाने संचालित किए जाने की बात सामने आई है।
यदि जांच में सब्सिडी की शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लाभार्थियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने शुरू की जांच और कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि किन लाभार्थियों ने योजना के तहत सब्सिडी प्राप्त की, उनके प्रस्तावित बकरी फार्म की वास्तविक स्थिति क्या है और स्वीकृत राशि का इस्तेमाल किस काम में किया गया।
इसके लिए योजना से जुड़े दस्तावेजों, सब्सिडी वितरण के रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद इकाइयों की स्थिति की जांच की जा सकती है। जांच में अनियमितता सामने आने पर विभाग नियमानुसार आगे के कदम उठा सकता है।
सरकारी सहायता के इस्तेमाल पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी योजनाओं के तहत दी जाने वाली सब्सिडी की निगरानी और उपयोग को लेकर सवाल खड़े किए हैं। योजना का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे और निर्धारित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत सहायता लेने वाले लाभार्थियों को योजना की शर्तों का पालन करना होता है। यदि कोई लाभार्थी गलत जानकारी देकर सहायता प्राप्त करता है या स्वीकृत उद्देश्य से अलग उसका इस्तेमाल करता है, तो जांच के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में संबंधित स्थान, लाभार्थियों की संख्या, सब्सिडी की कुल राशि और विभाग की ओर से प्रस्तावित कार्रवाई का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।