राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस से बढ़ाई बढ़त; 2273 वार्डों में निर्दलीय बने किंगमेकर
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। मतगणना के दौरान सामने आए नतीजों में भाजपा सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज करने वाली पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि कांग्रेस ने भी कई वार्डों में जीत हासिल करते हुए भाजपा को कड़ी टक्कर दी। वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने कई शहरी निकायों में बोर्ड गठन का गणित दिलचस्प बना दिया है।
सोमवार शाम तक सामने आए नतीजों के मुताबिक भाजपा ने 4,179 वार्डों में जीत दर्ज की है। वहीं कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए हैं। दोनों प्रमुख दलों के बीच कई जगहों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला। भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले अपनी बढ़त बनाए रखी और चुनावी नतीजों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई।
इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। कुल 2,273 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षदों के चुने जाने से उन शहरी निकायों में बोर्ड गठन का फैसला सीधे तौर पर किसी एक पार्टी के पक्ष में जाता नजर नहीं आ रहा है, जहां भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
ऐसे निकायों में निर्दलीय पार्षद अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में आ गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं। इसी वजह से निर्दलीय विजेता कई निकायों में बोर्ड गठन के लिए सबसे बड़े ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे हैं।
चुनावी नतीजों से यह भी साफ हुआ कि शहरी इलाकों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला काफी मजबूत रहा। भाजपा ने जहां सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस ने भी 3,613 वार्ड जीतकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत रखी। कई निकायों में जीत का अंतर कम रहने से स्थानीय स्तर पर मुकाबले की कड़ी तस्वीर सामने आई है।
बोर्ड गठन के लिए अब निर्वाचित पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जिन निकायों में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड का चेयरमैन या अध्यक्ष चुनने में निर्णायक हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति और पार्षदों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजे भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने भी बड़ी संख्या में वार्ड जीतकर मुकाबले को रोचक बनाए रखा है। अब असली चुनौती उन निकायों में बोर्ड बनाने की है, जहां बहुमत का आंकड़ा किसी एक दल के पास नहीं है। इन जगहों पर निर्दलीय पार्षदों का रुख तय करेगा कि सत्ता की कमान भाजपा के हाथ आती है, कांग्रेस के या फिर किसी अन्य समीकरण के जरिए बोर्ड का गठन होता है।