मदन राठौड़ के गढ़ में बीजेपी पिछड़ी, कांग्रेस 29 वार्ड जीती; वीडियो में देंखे बागियों ने बिगाड़ा गणित
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में पाली नगर निगम का परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा झटका लेकर आया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस ने 65 में से 29 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। बीजेपी को 21 वार्डों में जीत मिली, जबकि 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी।बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है और बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। फिलहाल उपलब्ध चुनाव परिणामों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि बोर्ड पूरी तरह कांग्रेस के नियंत्रण में होगा, क्योंकि उसे बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए समर्थन जुटाना होगा।
नामांकन खारिज होने के बाद भी कांग्रेस की वापसी
पाली चुनाव के दौरान कांग्रेस को शुरुआती स्तर पर बड़ा झटका लगा था। पार्टी के छह प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हो गए थे। इसके अलावा एक प्रत्याशी के बीजेपी को समर्थन देने की बात भी सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे थे।इसके बावजूद मतदान और मतगणना के बाद कांग्रेस ने 29 वार्डों में जीत दर्ज की। पाली के नतीजे बताते हैं कि शुरुआती झटकों के बावजूद पार्टी ने कई वार्डों में अपना आधार बनाए रखा और बीजेपी के मुकाबले अधिक सीटें हासिल कीं। पाली के सभी 65 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा दोनों पार्टियों का गणित
पाली में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। कुल 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए। यही संख्या बोर्ड गठन के समीकरण को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से चार सीट दूर है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।
बीजेपी में बगावत बनी चुनौती
बीजेपी के लिए चुनावी नुकसान की एक वजह पार्टी के भीतर बगावत को भी बताया जा रहा है। टिकट नहीं मिलने के बाद कई नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। इनमें पूर्व सभापति कुसुम सोनी, पूर्व पार्षद किशोर सोमनानी की पत्नी, कांतिलाल वैष्णव, पूर्व पार्षद जय जसवानी, निर्मल जोशी और महेंद्र वैष्णव के नाम शामिल हैं।स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में इन बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से बीजेपी के वोटों के बंटने की चर्चा रही। हालांकि किसी खास प्रत्याशी के कारण कितने वोटों का नुकसान हुआ, इसका निष्कर्ष वार्डवार वोट आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही निकाला जा सकता है।
संगठन के अंदर खींचतान की भी चर्चा
पाली में बीजेपी के स्थानीय संगठन और नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाएं भी चुनाव के दौरान सामने आईं। स्थानीय रिपोर्टों में पार्टी नेताओं के बीच तालमेल की कमी को चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर देखा गया है। ऐसे में पाली का परिणाम केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि टिकट वितरण, बागी उम्मीदवारों और स्थानीय संगठन के बीच तालमेल जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का विषय बन गया है।राज्य स्तर पर बीजेपी ने कई शहरी निकायों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन पाली में कांग्रेस के 29 और बीजेपी के 21 वार्ड जीतने से यहां की तस्वीर अलग रही। अब सभी की नजर निर्दलीय पार्षदों के रुख और बोर्ड गठन के अगले चरण पर है।