×

बीसलपुर प्रोजेक्ट का पीला पानी बना ‘मिस्ट्री’, 66 करोड़ खर्च के बाद भी 9 साल में तीसरी बार गंदे पेयजल की शिकायत

 

बीसलपुर प्रोजेक्ट से शहर में सप्लाई किए गए पीले पानी का मामला जलदाय विभाग के लिए पहेली बना हुआ है। विभाग ने अपनी लैब में पानी की जांच कराई, लेकिन अब तक पानी के रंग बदलने की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजी गई रिपोर्ट में पीले पानी की संभावित वजह हानिकारक एल्गी (काई) को बताया गया है।

बीसलपुर परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले नौ साल में यह तीसरी बार है, जब शहर के लोगों को गंदा और पीले रंग का पानी मिलने की शिकायत सामने आई है।

लैब जांच में नहीं मिली स्पष्ट वजह

पानी के पीले रंग को लेकर जलदाय विभाग ने अपने स्तर पर जांच कराई। विभागीय लैब में पानी के सैंपल की जांच की गई, लेकिन रिपोर्ट में ऐसी कोई ठोस वजह सामने नहीं आई, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पानी का रंग क्यों बदला।

इसके बाद मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के आधार पर आशंका जताई गई कि जलाशय में मौजूद हानिकारक एल्गी (काई) के कारण पानी का रंग प्रभावित हो सकता है।

बीसलपुर परियोजना पर उठे सवाल

बीसलपुर प्रोजेक्ट शहर की बड़ी पेयजल जरूरत को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। इस पर करीब 66 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बार-बार पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि घरों में साफ और सुरक्षित पानी नहीं पहुंच रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

नौ साल में तीसरी बार सामने आई समस्या

बीसलपुर से आने वाले पानी में गंदगी या रंग बदलने की समस्या पहली बार नहीं आई है। पिछले नौ वर्षों में यह तीसरा मौका है, जब शहरवासियों को पीले रंग के पानी की परेशानी का सामना करना पड़ा है।

बार-बार ऐसी स्थिति बनने से आम लोगों में चिंता बढ़ रही है। कई लोग मजबूरी में पानी को फिल्टर या उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

विभाग ने शुरू की निगरानी

जलदाय विभाग अब पानी की गुणवत्ता पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए लगातार जांच की जा रही है। साथ ही जलाशय और सप्लाई सिस्टम की निगरानी भी बढ़ाई गई है।

सरकार और विभाग की साख पर सवाल

पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा में बार-बार आ रही समस्या ने सरकार और जलदाय विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि केवल अस्थायी समाधान के बजाय स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न आए।

अब देखना होगा कि जांच में पीले पानी की असली वजह कब तक सामने आती है और विभाग इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।