अजमेर सेंट्रल जेल में बड़ा सवाल: जेलर के ऑफिस से कैदियों की वीडियो कॉल, 100 रेप के मास्टरमाइंड से कराई बात
अजमेर सेंट्रल जेल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि जेलर सद्दाम हुसैन ने अपने ऑफिस और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए कैदियों की वीडियो कॉल कराई। बताया जा रहा है कि इस वीडियो कॉल के जरिए कैदियों की बातचीत 100 रेप मामलों के मास्टरमाइंड बताए जा रहे नफीस चिश्ती से कराई गई।
जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना जेलर के ऑफिस में हुई और वीडियो कॉल के लिए जेलर के फोन का इस्तेमाल किया गया। जेल परिसर के अंदर कैदियों को मोबाइल फोन या वीडियो कॉल की सुविधा उपलब्ध कराना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला माना जाता है। ऐसे में जेलर के कार्यालय और फोन से कथित तौर पर हुई इस कॉल ने जेल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कैदियों को जेलर के कार्यालय में बुलाया गया, जहां से वीडियो कॉल के माध्यम से नफीस चिश्ती से उनकी बातचीत कराई गई। इस दौरान किस-किस कैदी ने बातचीत की और बातचीत का उद्देश्य क्या था, इसे लेकर जांच की जरूरत है।
मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जेलों में बंद कैदियों की बाहरी दुनिया से अनधिकृत संपर्क की संभावना को रोकने के लिए सख्त नियम लागू होते हैं। ऐसे में यदि जेलर के कार्यालय से ही इस तरह की कॉल कराई गई है तो यह सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया से अलग मामला माना जाएगा।
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जेलर के फोन से वीडियो कॉल करने की अनुमति किस आधार पर दी गई और कॉल के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि नफीस चिश्ती से बातचीत कितनी देर हुई और इसमें किन मुद्दों पर चर्चा की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल विभाग की ओर से जांच की जरूरत है। जांच में वीडियो कॉल से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की जानकारी और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जेल प्रशासन के स्तर पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अजमेर सेंट्रल जेल से सामने आए इस मामले ने एक बार फिर जेलों में मोबाइल और संचार माध्यमों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो कॉल किस परिस्थिति में कराई गई और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी। जेलर के कार्यालय और उनके फोन से कथित तौर पर हुई इस बातचीत ने अजमेर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है।