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राजस्थान यूनिवर्सिटी परीक्षा में बड़ी चूक: प्रश्नपत्र की जगह बांटी गई आंसर-की, हंगामा के बाद परीक्षा रद्द

 

University of Rajasthan में आयोजित MA समाजशास्त्र द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान एक गंभीर प्रशासनिक गलती सामने आई है। परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को प्रश्नपत्र के बजाय सीधे आंसर-की (उत्तर कुंजी) थमा दी गई, जिससे पूरे परीक्षा माहौल में अफरा-तफरी मच गई और छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

यह घटना परीक्षा केंद्रों पर उस समय सामने आई जब परीक्षा शुरू होने के बाद छात्रों ने पेपर खोलकर देखा। जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें प्रश्नों के बजाय उत्तर दिए गए हैं, छात्रों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

परीक्षा केंद्रों पर मचा हड़कंप

घटना के बाद कई परीक्षा केंद्रों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। छात्रों ने आरोप लगाया कि यह गंभीर लापरवाही है, जिससे उनकी तैयारी और पूरे शैक्षणिक सत्र पर असर पड़ सकता है। कुछ छात्रों ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की बड़ी चूक बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।

मौके पर मौजूद शिक्षकों और परीक्षा अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया। इसके बाद मामले की सूचना तुरंत विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई।

प्रशासन ने परीक्षा की रद्द

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए University of Rajasthan प्रशासन ने तुरंत निर्णय लेते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया। प्रशासन ने कहा कि यह एक तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी त्रुटि का मामला प्रतीत होता है, जिसकी विस्तृत जांच की जाएगी।

विश्वविद्यालय ने आश्वासन दिया है कि इस गलती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी गलती न हो इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

छात्रों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

घटना के बाद छात्रों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा को जल्द दोबारा आयोजित करने की मांग की है।

कई छात्र संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

जांच के आदेश संभव

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए जा सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र की जगह आंसर-की कैसे और किस स्तर पर गलती से भेजी गई। परीक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।