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राजस्थान में भूगोल बदलने का बड़ा फैसला: बाड़मेर और बालोतरा जिलों का पुनर्गठन

 

राजस्थान में प्रशासनिक और राजनीतिक भूगोल में बड़ा बदलाव किया गया है। आधी रात को जारी आदेश ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों के सीमाओं को पूरी तरह से बदल दिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। नए आदेश के अनुसार बायतु और गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्रों को नए जिले में शामिल कर दिया गया है।

राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार बाड़मेर और बालोतरा जिले अब नए भूगोल के तहत विभाजित होंगे। पहले बाड़मेर जिले में शामिल गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड अब बालोतरा जिले में स्थानांतरित किए गए हैं। वहीं, बालोतरा के बायतु उपखंड को बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है। इस बदलाव से दोनों जिलों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों और विकास योजनाओं में नए ढांचे के तहत बदलाव होगा।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय विकास, संसाधनों का बेहतर वितरण और स्थानीय प्रशासनिक कार्यों को सुगम बनाना है। अधिसूचना के मुताबिक नए जिलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां अब नए सीमाओं के अनुसार तय की जाएंगी।

बाड़मेर जिले में अब पांच उपखंड रहेंगे, जबकि बालोतरा में कुल नौ तहसील और पांच उपखंड होंगे। अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन ने इस बदलाव को लागू करते समय स्थानीय जनता की सुविधा और विकास योजनाओं को ध्यान में रखा है। उन्होंने बताया कि पट्टा, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में इस बदलाव के असर को न्यूनतम रखा जाएगा।

स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोग नए जिले में शामिल होने से विकास और प्रशासनिक सुविधा बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग हैं जिन्हें नए प्रशासनिक बदलाव से असुविधा हो सकती है। उन्हें अपने दस्तावेज और सरकारी कागजात नए जिले के अनुसार अपडेट करने की जरूरत होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बाड़मेर और बालोतरा जिलों का पुनर्गठन केवल भूगोलिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति और प्रशासनिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि नई सीमाओं के अनुसार संसाधनों का वितरण और विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन अब नए ढांचे के तहत होगा।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि नए जिले और उपखंडों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बदलाव के बावजूद जनता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।