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RGHS में बड़ा बदलाव: अब 2 हजार रुपये तक की सामान्य जांच के लिए सरकारी कर्मचारियों को नहीं लेनी होगी मंजूरी

 

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं में सोमवार से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। नई व्यवस्था के तहत अब ओपीडी में 2 हजार रुपये तक की सामान्य जांच कराने के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज के दौरान होने वाली प्रक्रिया संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी।

अब तक कई सामान्य जांचों के लिए मरीजों को पहले अनुमति प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, जिसके कारण इलाज में देरी और अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छोटी और जरूरी जांचों के लिए लाभार्थी सीधे अधिकृत स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधा ले सकेंगे।

आरजीएचएस के इस बदलाव का सबसे अधिक फायदा उन सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा, जिन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच या सामान्य बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। अब उन्हें छोटी जांच के लिए अलग से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

सरकार का उद्देश्य आरजीएचएस व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और लाभार्थी हितैषी बनाना है। चिकित्सा सुविधा लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 2 हजार रुपये तक की सामान्य जांच को मंजूरी प्रक्रिया से बाहर रखने का फैसला मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि, अधिक खर्च वाली जांच और उपचार के लिए पहले की तरह निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स संगठनों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि छोटी जांचों के लिए अनुमति लेने में समय लगता था, जिससे मरीजों को परेशानी होती थी। नई व्यवस्था से इलाज की प्रक्रिया तेज होगी और समय की बचत होगी।

आरजीएचएस राजस्थान सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना है, जिसके माध्यम से सरकारी कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनर्स को कैशलेस चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। योजना में लगातार सुधार कर इसे अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब लाभार्थियों को सामान्य ओपीडी जांच के लिए राहत मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और उपयोगिता दोनों में सुधार आएगा।