भीलवाड़ा का परंपरागत टेक्सटाइल में दबदबा, टेक्निकल टेक्सटाइल में शुरुआत की जरूरत
साल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सपनों के साथ अब टेक्सटाइल सेक्टर पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। देश की पारंपरिक कपड़ा उद्योग नगरी भीलवाड़ा, जिसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता है, परंपरागत टेक्सटाइल उत्पादन में अव्वल है। सालाना शूटिंग-शर्टिंग जैसे परंपरागत कपड़ों के मामले में भीलवाड़ा 125 करोड़ मीटर कपड़ा बनाकर देश में पहले पायदान पर है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में चीन और यूरोपीय देशों से टक्कर लेने के लिए अब केवल परंपरागत कपड़े ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए टेक्निकल टेक्सटाइल पर काम शुरू करना जरूरी हो गया है। टेक्निकल टेक्सटाइल में फिलहाल भीलवाड़ा का योगदान लगभग शून्य है।
टेक्निकल टेक्सटाइल में निर्माण, चिकित्सा, ऑटोमोबाइल, रक्षा और स्मार्ट टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कपड़े शामिल हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भीलवाड़ा इस क्षेत्र में कदम नहीं बढ़ाता, तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।
उद्योगपतियों का कहना है कि परंपरागत टेक्सटाइल में भीलवाड़ा की ताकत मजबूत है, लेकिन टेक्निकल टेक्सटाइल में निवेश, अनुसंधान और तकनीकी विशेषज्ञता लाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकारी सहायता, उद्योग-विश्वविद्यालय साझेदारी और नए उत्पादन केंद्र स्थापित करना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्निकल टेक्सटाइल में निवेश से भीलवाड़ा न केवल घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना सकता है। यह कदम रोजगार, तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
स्पष्ट है कि एशिया के मैनचेस्टर भीलवाड़ा को अब परंपरागत टेक्सटाइल के साथ-साथ टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी, ताकि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्यों में यह शहर अपनी अहम भूमिका निभा सके।