×

अहमदाबाद में बांग्लादेशियों को बसाने वाला राजस्थान से गिरफ्तार, देखे विडियो

 

गुजरात में अवैध रूप से घुसपैठ कर आए बांग्लादेशी नागरिकों को बसाने और उन्हें फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी लल्ला बिहारी उर्फ महमूद पठान को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह न केवल बांग्लादेश से चोरी-छुपे भारत आने वालों की मदद करता था, बल्कि गुजरात में उन्हें बसाने और उनके लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेज बनवाने का काम भी करता था।

<a href=https://youtube.com/embed/fMOv_BRYrE4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/fMOv_BRYrE4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

पुलिस के मुताबिक, महमूद पठान लंबे समय से गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था और उसके तार मानव तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से उसकी तलाश थी। गुप्त सूचना के आधार पर बांसवाड़ा में दबिश दी गई, जहां से उसे हिरासत में लिया गया।

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि महमूद पठान बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ कर आए लोगों को छिपाने, बसाने और उनकी पहचान बदलवाने में मदद करता था। वह उन्हें स्थानीय पते, पहचान पत्र, और यहां तक कि सरकारी योजनाओं में शामिल कराने की जुगत भी लगाता था। इसके बदले वह मोटी रकम वसूलता था।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इसके जरिए एक संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें फर्जीवाड़े और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। महमूद की गिरफ्तारी के बाद अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

इस गिरफ्तारी ने राज्य और केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है, क्योंकि अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर सकती है।

गुजरात पुलिस ने अब इस मामले की जांच को तेज करते हुए राष्ट्रीय पहचान पत्र, पासपोर्ट कार्यालय और स्थानीय निकायों से भी फर्जी दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। वहीं, बांसवाड़ा में भी पुलिस इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या आरोपी ने वहां भी कोई नेटवर्क खड़ा किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील होती हैं और इनके पीछे आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी या अन्य आपराधिक मंशाएं भी हो सकती हैं।