बांदीकुई जंक्शन को मिल रही रेल इतिहास की अनमोल सौगात
दौसा जिले के बांदीकुई रेल नगर को जल्द ही अपने रेल इतिहास से जुड़ी एक खास सौगात मिलने जा रही है। ब्रिटिश काल में “रेल नगरी” के नाम से मशहूर इस जंक्शन का पुराना वैभव अब एक बार फिर लौटता नजर आने वाला है।
दक्षिण रेलवे की गोल्डन रॉक वर्कशॉप, तिरूचिरापल्ली (तमिलनाडु) से विशेष रूप से लाया गया नैरो गेज क्लास-B का 11.43 टन वजनी विंटेज स्टीम इंजन बांदीकुई जंक्शन पर पहुंच चुका है। यह इंजन रेलवे प्रेमियों और इतिहासकारों के लिए एक सजीव विरासत के रूप में कार्य करेगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह स्टीम इंजन बांदीकुई की ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे जंक्शन परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि शहर के लोग और पर्यटक भारतीय रेलवे की गौरवमयी विरासत को करीब से देख और समझ सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल रेल इतिहास का संरक्षण नहीं है, बल्कि रेलवे पर्यटन को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को रेलवे इंजीनियरिंग के ऐतिहासिक पहलुओं से जोड़ने का भी अवसर है।
बांदीकुई जंक्शन के इतिहास में यह इंजन एक प्रतीक के रूप में खड़ा होगा, जो ब्रिटिश कालीन रेलवे वास्तुकला और उस दौर की तकनीकी उपलब्धियों की याद दिलाएगा।