बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बयान: बेटियों को ‘लव जिहाद’ से बचाने के लिए मां दुर्गा जैसी शक्ति स्वरूपा बनाएं
बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि बेटियों को ‘लव जिहाद’ जैसी चुनौतियों से बचाने के लिए उन्हें बुर्का पहनाने के बजाय मां दुर्गा जैसी शक्ति और आत्मविश्वास से लैस किया जाना चाहिए। उनका यह बयान सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल बाहरी दिखावे या कड़े नियमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि अगर बेटियां मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत हों और उन्हें शिक्षा, संस्कृति और आत्म-सम्मान की भावना से सशक्त किया जाए, तो उन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक चुनौती का सामना करने में आसानी होगी।
इस बयान का समर्थन पोकरण विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री का विचार सही दिशा में है और समाज को बेटियों के सशक्तिकरण की ओर ध्यान देना चाहिए। महंत प्रतापपुरी ने कहा कि केवल बाहरी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं; इसके साथ ही बेटियों में आत्मनिर्भरता और साहस का विकास करना भी जरूरी है।
समाजशास्त्रियों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह बयान सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सुरक्षा नियमों और परिधान के माध्यम से महिलाओं की रक्षा करना पर्याप्त नहीं है; उन्हें शिक्षा, आत्मसम्मान और नैतिक ताकत से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान उस समय आया है जब समाज में ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस तेज है। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि बेटियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना ही उनके सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। उनका मानना है कि मां दुर्गा की शक्ति और साहस के आदर्शों को अपनाकर युवा लड़कियां न केवल अपने अधिकारों को समझेंगी, बल्कि समाज में अपनी स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगी।
स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में इस बयान को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ता और महिला संगठन इसे सकारात्मक मान रहे हैं क्योंकि यह महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। वहीं, कुछ आलोचक इसे संवेदनशील सामाजिक विषय के संदर्भ में विवादास्पद भी बता रहे हैं।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री और समर्थक नेताओं का कहना है कि उनके बयान का उद्देश्य केवल बेटियों को शिक्षा और आत्मसशक्तिकरण के माध्यम से समाज में सुरक्षित और सशक्त बनाना है, न कि किसी समुदाय या विचारधारा को निशाना बनाना। उन्होंने सभी से अपील की है कि इस विचार को सकारात्मक रूप में देखा जाए और बेटियों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाए।
इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केवल परिधानों या बाहरी उपायों तक सीमित रहने की बजाय मानसिक, शारीरिक और सांस्कृतिक रूप से उन्हें मजबूत बनाना कितना जरूरी है।