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पेट्रोल-डीजल संकट पर अशोक गहलोत का हमला, वीडियो में बोले- ‘रिक्शा और पैदल चलना सिर्फ तमाशा’

 

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों तथा ईंधन की किल्लत को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने केंद्र और भाजपा सरकारों पर तीखा निशाना साधा है। गहलोत ने कहा कि जनता को राहत देने के बजाय भाजपा शासित राज्यों में केवल दिखावटी कदम उठाए जा रहे हैं।मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से कुछ कदम उठाने का आह्वान किया था, जिसके बाद भाजपा शासित राज्यों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने अलग-अलग तरीके से “नाटक” शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कोई रिक्शे में बैठकर गया, कोई पैदल चला और कोई इलेक्ट्रिक वैन में घूमता नजर आया।

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गहलोत ने तंज कसते हुए कहा, “ये तमाशा अभी भी चल रहा है। तमाशे से जनता के बीच सही संदेश नहीं जाता है।” उन्होंने कहा कि अगर नेता वास्तव में त्याग और सादगी दिखाना चाहते हैं तो उन्हें व्यवहारिक और स्थायी कदम उठाने चाहिए, तभी जनता उस संदेश को गंभीरता से लेगी।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ कैमरों के सामने रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन में बैठने से आम लोगों की समस्याएं हल नहीं होंगी। जनता बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और रोजमर्रा के खर्चों से परेशान है। ऐसे में सरकारों को ठोस फैसले लेने चाहिए।

गहलोत ने कहा, “अगर आप सच में कुछ त्याग करते हो, उसका संदेश सीधे लोगों तक पहुंचता है, लेकिन यहां सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए प्रतीकात्मक कदम उठा रही हैं।देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और कुछ इलाकों में सप्लाई की दिक्कतों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर बढ़ती लागत का असर बाजार और आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ईंधन की कीमतें हमेशा से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही हैं। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार ऊर्जा बचत और वैकल्पिक साधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कर रही है।सोशल मीडिया पर भी अशोक गहलोत का बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और उससे जुड़े राजनीतिक बयानों के बीच आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार महंगाई और ईंधन संकट को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।