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आशीष विद्यार्थी ने छात्रों से कहा- जिस फिल्म के लिए मुंबई गया था, वीडियो में देंखे वह आज तक नहीं बनी, असफलता से घबराना नहीं

 

बॉलीवुड अभिनेता और रंगकर्मी आशीष विद्यार्थी ने बुधवार को विद्यार्थियों के साथ अपनी अभिनय यात्रा, संघर्ष, असफलताओं और जिंदगी से मिली सीख साझा की। उन्होंने छात्रों को चुनौतियों से घबराने के बजाय उनसे सीखने, लगातार खुद को बेहतर बनाने और अपने हुनर पर भरोसा रखने के लिए प्रेरित किया। आशीष विद्यार्थी जेईसीआरसी फाउंडेशन के ओरिएंटेशन प्रोग्राम ‘परिचय’ में विद्यार्थियों से संवाद कर रहे थे।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वह अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मुंबई गए थे, तब जिस फिल्म में काम करने का सपना लेकर वह वहां पहुंचे थे, वह फिल्म आज तक नहीं बन पाई। इसके बावजूद उन्होंने इसे अपने जीवन की असफलता नहीं माना, बल्कि आगे बढ़ने का अनुभव समझा।आशीष विद्यार्थी ने कहा कि जिंदगी में हर व्यक्ति को अपनी यात्रा के दौरान मुश्किलों और असफलताओं का सामना करना पड़ता है। जरूरी यह नहीं है कि हर प्रयास सफल हो, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति असफलता से क्या सीखता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी चुनौती या असफलता को अपनी पहचान नहीं बनने देना चाहिए। इसके बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

नजरिया तय करता है अनुभव

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स्टूडेंट्स से बातचीत के दौरान आशीष विद्यार्थी ने जीवन में मिलने वाली टिप्पणियों और रिस्थितियों से निपटने के तरीके पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसी परिस्थिति का असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति उसे किस नजरिए से देखता है।उन्होंने अपने रंग को लेकर होने वाली टिप्पणियों का उदाहरण देते हुए कहा, “मैं अपने रंग पर हंसा तो ह्यूमर कहलाएगा और तुम हंसोगे तो रेसिजम कहलाएगा।” इस बात के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि समाज की टिप्पणियों को लेकर व्यक्ति का नजरिया और उसकी प्रतिक्रिया काफी मायने रखती है।उन्होंने कहा कि जिंदगी में लोग तरह-तरह की बातें करेंगे और कई बार ऐसी टिप्पणियां भी सुनने को मिलेंगी, जो व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं। लेकिन हर बात को दिल पर लेने के बजाय यह समझना जरूरी है कि सामने वाले की बात का हम पर कितना प्रभाव पड़ने देना है।

गाली पर भी दी जिंदगी की सीख

आशीष विद्यार्थी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति आपको गाली देता है और उसकी बात से आपको बुरा नहीं लगता, तो समझना चाहिए कि उसकी बात खाली रह गई। उनके मुताबिक, दूसरे व्यक्ति की नकारात्मक बात तभी प्रभाव डालती है, जब हम उसे अपने ऊपर हावी होने देते हैं।उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी ऊर्जा दूसरों की टिप्पणियों में खर्च करने के बजाय अपने काम और हुनर को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। सफलता के लिए लगातार सीखते रहना और अपने भीतर सुधार की गुंजाइश बनाए रखना जरूरी है।कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आशीष विद्यार्थी की अभिनय यात्रा और उनके अनुभवों को ध्यान से सुना। उनके संघर्ष और असफलताओं से जुड़ी बातों ने छात्रों को यह संदेश दिया कि करियर की राह में रुकावटें आना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति हर अनुभव से कुछ सीखे और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता रहे।