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अरावली आदेश का बड़ा असर: 3.5 लाख रोजगार पर संकट, 7700 साइटों पर प्रतिबंध से उद्योगों में चिंता

 

राजस्थान में अरावली क्षेत्र को लेकर जारी आदेश का असर अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। राज्य में करीब 7700 साइटों पर प्रतिबंध लगने से खनन और उससे जुड़े उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है। उद्योग जगत का दावा है कि इस फैसले से लगभग 3.5 लाख लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

Rajasthan में अरावली पर्वतमाला पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई क्षेत्रों में खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, इस आदेश के बाद उद्योगों और श्रमिकों की चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर पत्थर, मार्बल, ग्रेनाइट, बजरी और खनिज आधारित उद्योगों पर पड़ रहा है। कई खदानों और प्रोसेसिंग यूनिट्स का संचालन प्रभावित हुआ है, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

उद्योग संगठनों का कहना है कि अचानक लगाए गए प्रतिबंध से छोटे कारोबारियों, ट्रांसपोर्ट कारोबार और मजदूर वर्ग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका दावा है कि खनन और इससे जुड़े व्यवसायों पर लाखों परिवारों की आजीविका निर्भर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली क्षेत्र का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि यह पर्यावरण संतुलन, भूजल संरक्षण और जलवायु नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन साथ ही रोजगार और उद्योगों के हितों के बीच संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ वैकल्पिक रोजगार और चरणबद्ध व्यवस्था पर भी काम किया जाए। उनका कहना है कि यदि लंबे समय तक गतिविधियां बंद रहीं तो आर्थिक नुकसान और बेरोजगारी की समस्या और बढ़ सकती है।

कई जिलों में खनन गतिविधियां प्रभावित होने के कारण ट्रांसपोर्ट, मशीनरी, निर्माण और छोटे व्यापारों पर भी असर पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि काम बंद होने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और अंधाधुंध दोहन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में पर्यावरणीय संकट और गंभीर हो सकता है।

फिलहाल, उद्योग जगत और सरकार के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के बीच संतुलन बनाने के लिए आगे क्या समाधान निकाला जाता है।