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जयपुर नगर निगम चुनाव से पहले माली-सैनी समाज का बहिष्कार ऐलान, वीडियो में देंखे BJP-कांग्रेस की बढ़ी चिंता; 45 हजार वोटरों के प्रभावित होने का दावा

 

जयपुर नगर निगम चुनाव से पहले माली-सैनी समाज के मतदान बहिष्कार के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कथित अनदेखी के विरोध में सिविल लाइंस और किशनपोल विधानसभा क्षेत्रों में मतदान नहीं करने का फैसला किया है। इस घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों की चुनावी रणनीति पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। माली समाज का दावा है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 45 हजार सैनी (माली) समाज के मतदाता हैं। समाज का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता होने के बावजूद नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने समाज के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया।

टिकट नहीं मिलने से नाराजगी

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समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि राजनीतिक दल चुनावों के दौरान समाज के मतदाताओं का समर्थन तो चाहते हैं, लेकिन प्रतिनिधित्व देने के मामले में उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।इसी नाराजगी के चलते माली-सैनी समाज ने चुनाव से दूरी बनाने का फैसला किया है। समाज की ओर से मतदान बहिष्कार को लेकर लोगों के बीच अभियान चलाने की बात कही गई है।

NOTA के इस्तेमाल की अपील

समाज ने यह भी अपील की है कि यदि कोई मतदाता मतदान करना चाहता है तो वह किसी प्रत्याशी या राजनीतिक दल के पक्ष में वोट देने के बजाय NOTA (None of the Above) का विकल्प चुनकर अपना विरोध दर्ज कराए।समाज के नेताओं का कहना है कि यह कदम किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने के विरोध में उठाया जा रहा है।

निकाय चुनाव के समीकरण पर असर की संभावना

जयपुर नगर निगम चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में माली-सैनी समाज के बहिष्कार के ऐलान से चुनावी गणित प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।सिविल लाइंस और किशनपोल जैसे क्षेत्रों में यदि बड़ी संख्या में मतदाता मतदान से दूर रहते हैं तो इसका सीधा असर उम्मीदवारों के वोट प्रतिशत पर पड़ सकता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए समाज की नाराजगी को दूर करना बड़ी चुनौती बन सकती है।

राजनीतिक दलों के सामने चुनौती

नगर निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ सामाजिक समीकरण भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं। माली-सैनी समाज का यह रुख चुनावी माहौल में नया मुद्दा बन गया है।अब देखना होगा कि मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस की ओर से समाज को मनाने के लिए कोई पहल की जाती है या नहीं। फिलहाल समाज अपने फैसले पर कायम है और बहिष्कार अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।