97 वर्गगज के 297 साल पुराने मकान का पट्टा मांगती रहीं बुजुर्ग महिला, अब हेरिटेज बहाली के आदेश से बढ़ा लाखों का बोझ
नगर निगम के नियम-कायदों की उलझन में एक बुजुर्ग महिला की परेशानी बढ़ गई है। जयपुर के चांदपोल स्थित गोविंद रावजी का रास्ता में रहने वाली कनकलता माहेश्वरी पिछले 5 साल से अपने 97 वर्गगज के जर्जर मकान का पट्टा लेने के लिए नगर निगम के चक्कर काटती रहीं। लेकिन उन्हें पट्टा नहीं मिला। अब निगम ने उन्हें ऐसा आदेश थमा दिया है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
नगर निगम ने करीब 297 साल पुराने मकान को उसके मूल हेरिटेज स्वरूप में लौटाने का निर्देश जारी किया है। परिवार का कहना है कि पुराने मांडणे, पेंटिंग, झरोखे और नक्काशी को दोबारा उसी स्वरूप में तैयार करने में करीब 50 से 60 लाख रुपए का खर्च आएगा।
पट्टे की मांग, मिला हेरिटेज बहाली का आदेश
कनकलता माहेश्वरी का परिवार लंबे समय से मकान के पट्टे के लिए प्रयास कर रहा था। उनका कहना है कि जर्जर स्थिति में पहुंच चुके मकान की मरम्मत और सुरक्षा के लिए पट्टे की जरूरत थी।
परिवार ने आरोप लगाया कि वर्षों तक निगम कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बजाय अब उन्हें मकान को पुराने हेरिटेज स्वरूप में लाने का आदेश दे दिया गया है।
परिवार के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती
परिवार के अनुसार, मकान में पुराने समय की वास्तुकला, कलात्मक झरोखे, दीवारों पर बनी पेंटिंग और पारंपरिक सजावट मौजूद थी। इन्हें दोबारा उसी रूप में तैयार करना आसान नहीं है।
परिवार का अनुमान है कि हेरिटेज बहाली के काम में करीब 50 से 60 लाख रुपए तक खर्च हो सकते हैं। ऐसे में बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
जयपुर की विरासत और नियमों के बीच संतुलन की चुनौती
जयपुर का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों और हेरिटेज वास्तुकला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में हेरिटेज भवनों के संरक्षण के लिए नियम बनाए गए हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने मकानों के संरक्षण के साथ-साथ वहां रहने वाले परिवारों की समस्याओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवार का कहना है कि जब वे मकान को नियमित कराने और पट्टा लेने के लिए प्रयास कर रहे थे, तब उनकी समस्या का समाधान होना चाहिए था।
अब देखना होगा कि निगम और परिवार के बीच इस मामले में आगे क्या समाधान निकलता है। फिलहाल 297 साल पुराने इस मकान की विरासत बचाने और बुजुर्ग महिला की परेशानी दूर करने के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।