सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच डूंगरपुर के 14 गांवों का बड़ा फैसला, आदिवासी समाज ने बदली परंपरा
आसमान छूती सोने-चांदी की कीमतों के बीच डूंगरपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से एक ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से अहम निर्णय सामने आया है। जिले के 14 गांवों के आदिवासी समाज ने परंपरागत आभूषणों और दिखावटी खर्चों पर रोक लगाने का सामूहिक फैसला लिया है, ताकि आर्थिक बोझ कम हो और फिजूलखर्ची पर लगाम लग सके।
लगातार बढ़ रही सोने-चांदी की कीमतों ने ग्रामीण और गरीब परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में भारी मात्रा में गहने पहनने की परंपरा के चलते परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता था। इसी समस्या को देखते हुए समाज के बुजुर्गों और पंचों की बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि अब विवाह और अन्य समारोहों में सोने-चांदी के महंगे गहनों का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। दुल्हन और परिवार के सदस्य सीमित और साधारण आभूषण ही पहनेंगे। साथ ही, अनावश्यक खर्च और दहेज प्रथा पर भी रोक लगाने का संकल्प लिया गया है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि कई परिवार केवल सामाजिक दबाव के कारण महंगे गहने खरीदते हैं, जिससे उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। इससे आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वर्षों तक कर्ज चुकाने में परेशानी होती है। इस फैसले से लोगों को राहत मिलेगी और बचत को शिक्षा व जरूरी जरूरतों पर खर्च किया जा सकेगा।ग्रामीणों ने बताया कि यह पहल सामाजिक समानता को भी बढ़ावा देगी। अमीर-गरीब के बीच दिखावे की होड़ खत्म होगी और सादगी से समारोह आयोजित किए जा सकेंगे।
स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी इस निर्णय की सराहना की है। उनका मानना है कि यह कदम अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।आर्थिक दबाव के इस दौर में डूंगरपुर के आदिवासी समाज का यह फैसला न केवल परंपराओं में बदलाव का संकेत है, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में एक मजबूत पहल भी माना जा रहा है।