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बजट 2026 की तैयारियों के बीच टीकाराम जूली ने राजस्थान को 'विशेष राज्य का दर्जा' देने की मांग उठाई

 

बजट 2026 की तैयारियों के बीच राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा उठाया है। उन्होंने राजस्थान को केंद्र सरकार से 'विशेष राज्य का दर्जा' दिए जाने की मांग की है। जूली ने अपनी मांग के पीछे कई ठोस तर्क पेश किए हैं, जिनका असर दिल्ली तक महसूस किया जा रहा है।

टीकाराम जूली का कहना है कि राजस्थान राज्य में भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियां अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं। उन्होंने विधानसभा में यह भी कहा कि जल संकट, सीमांत इलाकों की आर्थिक समस्याएं, कृषि क्षेत्र की चुनौतियां और सीमावर्ती सुरक्षा मुद्दों को देखते हुए राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। उनके अनुसार, इससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

राजस्थान के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए जूली ने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से केंद्र सरकार से अधिक अनुदान, वित्तीय सहायता और विकास परियोजनाओं का लाभ राज्य को मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इससे रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की गति बढ़ेगी।

जूली की इस मांग ने दिल्ली में हलचल मचा दी है। केंद्र सरकार और नीति निर्माताओं ने इस प्रस्ताव पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बजट 2026 की तैयारियों के समय यह मुद्दा केंद्र सरकार और राजस्थान दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 'विशेष राज्य का दर्जा' देने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, लेकिन राजस्थान की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीर विचार हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मांग केवल राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि विकास और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम हो सकता है।

टीकाराम जूली की पहल ने विपक्ष और सरकार के बीच भी चर्चा को जन्म दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम बजट सत्र के दौरान आर्थिक और विकास नीति पर चर्चा को और गहरा कर सकता है। वहीं, आम जनता और विभिन्न संगठनों में भी इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।