प्रसूताओं की मौत के मामलों के बीच एक्शन में स्वास्थ्य मंत्री, वीडियो में जाने जयपुर के दो बड़े महिला अस्पतालों का किया औचक निरीक्षण
प्रदेश में लगातार सामने आ रही प्रसूताओं की मौत की घटनाओं के बीच राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को जयपुर के सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय और चांदपोल स्थि जनाना अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों को मिल रही सेवाओं और नई इमारतों के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। मंत्री ने अस्पतालों की ओपीडी, आईपीडी, आईसीयू सहित विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
नई बिल्डिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने दोनों अस्पतालों में निर्माणाधीन नई बिल्डिंग का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्य की प्रगति और मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखते हुए मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।
प्रसूताओं की मौत पर क्या बोले मंत्री?
प्रदेश में हाल के दिनों में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि राजस्थान की स्थिति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय औसत से बेहतर है।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रति एक लाख प्रसव पर 86 से अधिक मातृ मृत्यु नहीं होनी चाहिए। राज्य के पिछले एक वर्ष के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान इस निर्धारित औसत के दायरे में है और इस मामले में राज्य की स्थिति "वेल विद-इन" है।
दो महीने में बीमारी का बढ़ा असर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कई बार मलेरिया, टाइफस जैसी बीमारियों के मामलों में अचानक बढ़ोतरी (स्पाइक) देखने को मिलती है। उनके अनुसार, मौजूदा मामलों में भी पिछले दो महीनों के दौरान ऐसा ही स्पाइक सामने आया है, जिससे कुछ घटनाएं बढ़ी हैं।लांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पूरे वर्ष के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो मातृ मृत्यु दर अभी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय औसत सीमा के भीतर बनी हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर
मंत्री खींवसर ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रसूताओं और नवजात शिशुओं के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है तथा अस्पतालों में आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हाल के दिनों में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार से जवाब मांगा है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री का यह औचक निरीक्षण और मातृ मृत्यु दर को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।