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केंद्र सरकार की योजना में कथित घोटाले का आरोप: परियोजना निदेशक और चीफ इंजीनियर पर चहेती फर्म को लाभ पहुंचाने के आरोप

 

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक और कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-जल विभाग के परियोजना निदेशक एवं मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) सूरजभान सिंह ने नियमों की अनदेखी करते हुए एक चहेती फर्म को बिना कार्य कराए ही लाखों रुपये का लाभ पहुंचाया।

मामले में आरोप लगाया गया है कि संबंधित फर्म को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना भुगतान या आर्थिक लाभ दिया गया, जबकि आरोप के अनुसार संबंधित कार्य या तो पूरा नहीं हुआ था या फिर कराया ही नहीं गया। इस कथित अनियमितता को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मामले के सामने आने के बाद संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग उठने लगी है। आरोप है कि सरकारी धन के उपयोग में वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया गया और इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। जांच एजेंसियां और विभागीय अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं कि भुगतान किस आधार पर किया गया, कार्य की प्रगति क्या थी और प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

हालांकि, इस मामले में अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि मामले की विभागीय या स्वतंत्र जांच शुरू की गई है या नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। जांच में यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल पूरा मामला आरोपों के स्तर पर है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे मामलों में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जाती है।