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राजस्थान में AI से बचेगी डायबिटीज मरीजों की आंखों की रोशनी, वीडियो में देंखे 40 शहरों में शुरू होगा ‘मिशन मधुनेत्र-AI’

 

राजस्थान में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों की आंखों की रोशनी बचाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाएगा। राज्य सरकार ने शुरुआती स्तर पर मिले सकारात्मक परिणामों के बाद ‘मिशन मधुनेत्र-AI’ अभियान को बड़े स्तर पर लागू करने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत प्रदेश के 40 शहरों के अस्पतालों में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए आंखों की जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।

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यह पहल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स दिल्ली के सहयोग से शुरू की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य डायबिटीज से जुड़ी आंखों की गंभीर बीमारी डायबिटीज रेटिनोपैथी की समय रहते पहचान कर मरीजों को अंधेपन से बचाना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज रेटिनोपैथी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक शुगर लेवल अनियंत्रित रहने के कारण आंखों की रेटिना की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए, तो मरीज की आंखों की रोशनी तक जा सकती है। अक्सर यह बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है, जिससे समय पर पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

‘मिशन मधुनेत्र-AI’ के तहत अस्पतालों में AI आधारित स्क्रीनिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो मरीजों की आंखों की तस्वीर लेकर तुरंत उसका विश्लेषण करेंगे। इससे डॉक्टरों को जल्दी और सटीक निदान करने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि इस तकनीक के जरिए ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलेगा और आंखों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई है, ताकि वे इस नई तकनीक का प्रभावी तरीके से उपयोग कर सकें।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदेशभर में इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से न केवल मरीजों की आंखों की रोशनी बचाई जा सकेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल का एक नया मॉडल भी तैयार होगा। आने वाले समय में इस पहल को और अधिक शहरों और जिलों तक विस्तार देने की योजना भी बनाई जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जांच और इलाज सुनिश्चित किया जाए, तो डायबिटीज रेटिनोपैथी से होने वाले अंधेपन के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में ‘मिशन मधुनेत्र-AI’ प्रदेश के लिए एक अहम और दूरदर्शी कदम साबित हो सकता है।