पंचायत-निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के इस दिग्गज नेता को लगा तगड़ा झटका, भजनलाल सरकार ने लिया बड़ा फैसला
राजस्थान में आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैलाश चोटिया को राजनीतिक झटका लगा है। इस घटना ने प्रदेश कांग्रेस में हलचल पैदा कर दी है और चुनावी तैयारियों पर असर डालने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह झटका मुख्य रूप से पार्टी के भीतर गुटबाजी और चुनावी रणनीति से जुड़ा है। कैलाश चोटिया के राजनीतिक विरोधी और स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेता उनकी स्थिति को चुनौती दे रहे हैं। इससे उनका प्रभाव कुछ क्षेत्रों में कम हो गया है और आगामी चुनावी उम्मीदवारों के चयन में भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य वरिष्ठ नेता इस मामले की गहन समीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी में सभी नेताओं के साथ संपर्क और संवाद बनाए रखना चुनावी जीत के लिए जरूरी है। वहीं, कैलाश चोटिया ने मीडिया से कहा कि वह पार्टी की रणनीति और संगठन की मजबूती के लिए हर स्तर पर काम जारी रखेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव से पहले किसी भी वरिष्ठ नेता को झटका लगना आम राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर इसे समय पर नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के मनोबल और पार्टी की छवि पर असर डाल सकता है।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कैलाश चोटिया की स्थिति मजबूत थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में पार्टी के भीतर रणनीतिक मतभेद और उम्मीदवार चयन को लेकर बहस बढ़ी थी। इसी बहस के कारण उन्हें राजनीतिक झटका महसूस हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंचायती और नगर निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों और नेताओं का महत्व अधिक होता है। ऐसे में किसी प्रमुख नेता की भूमिका प्रभावित होना पार्टी के स्थानीय चुनाव अभियान को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
अंततः, राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस नेता कैलाश चोटिया को लगा झटका पार्टी के लिए सोचने का विषय है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व और कैलाश चोटिया दोनों ने आश्वासन दिया है कि संगठन को मजबूत बनाना और चुनावी रणनीति पर ध्यान देना उनकी प्राथमिकता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक झटका पार्टी के प्रदर्शन और चुनावी परिणामों को कैसे प्रभावित करता है।