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तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा अग्निवीर युवराज सिंह का पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन में उमड़ा जनसैलाब

 

अखनूर सेक्टर में देश की सेवा करते हुए शहीद हुए अग्निवीर युवराज सिंह का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो पूरा माहौल गम और गर्व से भर उठा। गांव की गलियों में जैसे ही सेना का वाहन पहुंचा, हर आंख नम हो गई और “भारत माता की जय” तथा “शहीद युवराज सिंह अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

शहीद जवान के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हर किसी की आंखों में आंसू थे, लेकिन साथ ही देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवान पर गर्व भी साफ नजर आ रहा था।

इस दौरान सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब मां ने अपने जवान बेटे का तिरंगे में लिपटा शव देखा। बेटे को अंतिम बार देखने के बाद मां बेसुध हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो उठीं। पिता और अन्य परिजन लगातार बेटे की वीरता को याद करते हुए गर्व और दुख के बीच खुद को संभालने की कोशिश करते नजर आए।

सेना के अधिकारियों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और राष्ट्रध्वज परिजनों को सौंपा। अंतिम संस्कार के दौरान पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर जवान को अंतिम विदाई दी।

ग्रामीणों ने बताया कि युवराज सिंह बचपन से ही देशसेवा का सपना देखते थे। सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने परिवार और गांव का नाम रोशन किया। उनकी शहादत ने पूरे इलाके को गर्व का एहसास कराया है, हालांकि इस बलिदान ने हर किसी को भावुक भी कर दिया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि देश हमेशा अपने वीर सपूतों के बलिदान का ऋणी रहेगा।

युवराज सिंह की शहादत ने एक बार फिर देशभक्ति और बलिदान की उस भावना को जीवंत कर दिया है, जिसके लिए भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं। गांव में हर व्यक्ति की जुबान पर बस एक ही बात थी—“ऐसे वीर जवानों पर पूरे देश को गर्व है।”