एसआईआर के बाद मतदाता सूची में बदलाव को लेकर आपत्तियां, भाजपा ने 18,896 और कांग्रेस ने 2 नाम हटवाने की मांग की
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद प्रदेश की मतदाता सूची में संशोधन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एसआईआर के तहत सामने आए आंकड़ों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां 18 हजार 896 नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई हैं, वहीं कांग्रेस ने केवल 2 नाम हटवाने को लेकर आपत्ति दी है। इसके अलावा सभी राजनीतिक दलों की ओर से 478 नए नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए आवेदन किए गए हैं।
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईआर के बाद सामने आए प्रारंभिक आंकड़ों पर सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति न बने।
निर्वाचन विभाग ने बताया कि एसआईआर के बाद आपत्ति और दावे दर्ज कराने के लिए आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को एक महीने का समय दिया गया है। हालांकि प्रशासनिक कारणों से फिलहाल यह अंतिम तिथि 19 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। इस अवधि में कोई भी पात्र व्यक्ति अपने नाम को जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित आपत्ति दर्ज करा सकता है।
भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई बड़ी संख्या में आपत्तियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल हैं, जो या तो स्थानांतरित हो चुके हैं, मृत हैं या फिर अपात्र हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए ऐसे नामों को हटाना जरूरी है।
वहीं कांग्रेस की ओर से महज दो नाम हटवाने की आपत्ति दर्ज कराना भी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी ओर से जमीनी स्तर पर जांच के बाद ही आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं और वे मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं करना चाहते।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी आपत्तियों और दावों की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और निर्वाचन अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे। जांच पूरी होने के बाद ही मतदाता सूची में अंतिम संशोधन किया जाएगा।
निर्वाचन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार एसआईआर के दौरान तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया है। डिजिटल रिकॉर्ड, आधार से लिंकिंग और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए सूची को अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी या दोहरे नामों को हटाकर वास्तविक मतदाताओं को उनका अधिकार सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक दलों को भी आयोग की ओर से यह छूट दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने स्तर पर सूची का परीक्षण कर आपत्तियां दर्ज करवा सकते हैं। आयोग ने सभी दलों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
अब 19 जनवरी तक मिलने वाली आपत्तियों के बाद निर्वाचन विभाग की चुनौती होगी कि वह समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से सभी मामलों का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची जारी करे। आगामी चुनावों को देखते हुए यह प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला होती है।