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3 घंटे रेंगकर पहुंची पुलिस, ऊंचाई पर बने ठिकाने पर दबिश देकर तस्करों को दबोचा

 

तस्करों तक बिना भनक पहुंचने के लिए पुलिस ने बेहद साहसिक और रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम को करीब तीन घंटे तक रेंगते हुए दुर्गम रास्तों से गुजरकर तस्करों के ठिकाने तक पहुंचना पड़ा। यह ठिकाना एक अधूरे बने ढांचे में ऊंचाई पर स्थित था, जहां से तस्कर आसपास की हर गतिविधि पर नजर रख सकते थे।

जानकारी के अनुसार पुलिस को इनपुट मिला था कि तस्कर ऊंचाई पर बने इस ठिकाने को सुरक्षित अड्डे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। स्थान ऐसा था कि दूर से ही आने-जाने वालों पर नजर रखी जा सकती थी। ऐसे में सीधे कार्रवाई करने पर तस्करों के सतर्क होने और फरार होने की आशंका थी।

इसी को देखते हुए पुलिस ने बेहद गोपनीय रणनीति बनाई। ऑपरेशन की भनक तस्करों तक न पहुंचे, इसके लिए पुलिस टीम ने सामान्य रास्तों के बजाय बेहद कठिन और छिपे मार्गों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि जवानों को करीब तीन घंटे तक रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ा, ताकि कोई आवाज या हलचल तस्करों तक न पहुंचे।

यह कार्रवाई चुनौतीपूर्ण इसलिए भी थी क्योंकि अधूरा बना ढांचा ऊंचाई पर होने के कारण तस्करों को निगरानी में बढ़त हासिल थी। वहां से वे दूर-दूर तक गतिविधियों पर नजर रख सकते थे। ऐसे में पुलिस के लिए चुपचाप वहां तक पहुंचना किसी बड़े ऑपरेशन से कम नहीं था।

लंबी और जोखिम भरी मूवमेंट के बाद पुलिस टीम ने सही समय पर ठिकाने को घेर लिया और दबिश दी। अचानक हुई कार्रवाई से तस्कर संभल नहीं सके। पुलिस की इस रणनीति और धैर्य की अब सराहना की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें गोपनीयता सबसे बड़ी चुनौती थी। यदि तस्करों को जरा भी भनक लगती तो वे फरार हो सकते थे या जवाबी कार्रवाई की आशंका भी थी। लेकिन पुलिस ने संयम और सूझबूझ से ऑपरेशन को सफल बनाया।

यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि पुलिस की रणनीतिक क्षमता का भी उदाहरण मानी जा रही है। दुर्गम इलाके, ऊंचाई पर ठिकाना और तस्करों की निगरानी जैसी चुनौतियों के बीच ऑपरेशन को अंजाम देना आसान नहीं था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संगठित अपराध के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं इस ऑपरेशन ने दिखाया कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस किस स्तर तक जोखिम उठाने को तैयार है।

फिलहाल इस कार्रवाई की चर्चा पूरे क्षेत्र में है और तीन घंटे रेंगकर की गई इस दबिश को बेहद साहसिक ऑपरेशन के तौर पर देखा जा रहा है।