महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में आंसर शीट जांच वीडियो वायरल, परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल
राजस्थान के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) में 16 जनवरी 2026 को हुई आंसर शीट जांच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में एक लड़का और लड़की को कॉपियां जांचते हुए देखा जा सकता है, जिससे विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह वीडियो केवल एक isolated घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से चल रही अनियमितताओं का सबूत हो सकता है। वायरल वीडियो ने छात्रों में गुस्सा और चिंता बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है।
वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला गंभीर है और जांच टीम सभी संबंधित कर्मचारियों और मूल्यांकन प्रक्रिया का पूरी तरह निरीक्षण कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भी अनियमितता की पुष्टि होती है तो कानूनी और शैक्षणिक कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों ने कहा कि वीडियो में दिखाई गई प्रक्रिया से यह लगता है कि कॉपी जांच में पारदर्शिता और नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की है कि पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा मूल्यांकन और आंसर शीट जांच में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की अनियमितताएं लगातार होती रहीं, तो इससे शैक्षणिक संस्थानों की प्रतिष्ठा और छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
राजस्थान में पिछले कुछ सालों में कई विश्वविद्यालयों में परीक्षा और आंसर शीट मूल्यांकन को लेकर विवाद सामने आए हैं। ऐसे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी निगरानी और प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सीसीटीवी निगरानी, डबल ब्लाइंड जांच प्रणाली और डिजिटल मूल्यांकन को अपनाकर इस तरह की समस्याओं को रोका जा सकता है।
इस मामले ने छात्रों और अभिभावकों में विश्वास की कमी पैदा कर दी है। छात्र संगठन और शिक्षाविद अब विश्वविद्यालय से मांग कर रहे हैं कि आंसर शीट जांच की पूरी प्रक्रिया और नियमावली को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल जांच से ही निष्पक्षता और पारदर्शिता स्थापित हो सकती है।
अजमेर विश्वविद्यालय की यह घटना यह दर्शाती है कि शैक्षणिक संस्थानों में मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी कितनी जरूरी है। छात्र और समाज चाहते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता बनी रहे, ताकि किसी भी छात्र के अधिकारों के साथ अन्याय न हो।
इस वायरल वीडियो ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चेतावनी दी है, बल्कि पूरे राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में परीक्षा मूल्यांकन की पारदर्शिता पर भी बहस छेड़ दी है। अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।