जर्जर सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना, 12,335 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित
प्रदेश में जर्जर और क्षतिग्रस्त सरकारी स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में स्कूलों के ढांचे को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर सुधार कार्य किए जाएंगे।
इस संबंध में मुख्य सचिव की ओर से हाईकोर्ट में 792 पेज की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य सरकार ने स्कूल भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए 12,335 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है, जहां भवन जर्जर होने के कारण छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
योजना के तहत उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी स्थिति अत्यंत खराब है। इसके अलावा, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे कक्षा कक्षों की मरम्मत, शौचालयों का निर्माण, पेयजल व्यवस्था, बिजली और फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाओं को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिससे प्रत्येक वर्ष निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य पूरे किए जा सकें। साथ ही, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा उत्पन्न न हों।
हाईकोर्ट में प्रस्तुत इस रिपोर्ट को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल स्कूलों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और उपस्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सरकार का यह प्रयास प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और छात्रों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस कार्ययोजना के परिणाम राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखने को मिल सकते हैं।