नागौर के गोटन में 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत, परिवार में शोक
राजस्थान के नागौर जिले के गोटन कस्बे में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 9 साल की छात्रा की अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) से मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बच्ची खेलते-खेलते अचानक लड़खड़ाकर गिरती हुई दिखाई दे रही है।
स्कूल स्टाफ ने बताया कि बच्ची अचानक गिरने के बाद बेहोश हो गई और तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि बच्ची की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है। स्कूल प्रशासन और शिक्षक इस घटना से स्तब्ध हैं और उन्होंने बच्ची के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
परिवार इस हादसे से गहरे सदमे में है। खासकर इसलिए कि लगभग पांच महीने पहले बच्ची के बड़े भाई की भी इसी तरह अचानक मौत हो गई थी। परिवार का कहना है कि इस तरह की लगातार दो दुखद घटनाओं ने पूरे घर को भावनात्मक रूप से हिला दिया है।
सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि बच्ची खेल के दौरान अचानक लड़खड़ाई और गिर गई। यह दृश्य स्कूल स्टाफ और अन्य छात्रों के लिए भी काफी चिंताजनक रहा। प्रशासन ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की समीक्षा शुरू कर दी है।
स्थानीय लोग और माता-पिता इस घटना के बाद चिंतित हैं और मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में अचानक हृदयाघात जैसे मामलों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आनुवंशिक या पूर्व रोगों का पता लगाना आवश्यक है।
राजस्थान प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा कि स्कूलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया और चिकित्सक उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही परिवार को मानसिक और चिकित्सीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
यह दुखद घटना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे गोटन कस्बे और आसपास के लोगों के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। स्कूलों में खेल और शारीरिक गतिविधियों के दौरान बच्चों की निगरानी को और कड़ा किया जाएगा।
अंततः, नागौर जिले के गोटन कस्बे में हुई इस त्रासदी ने परिवार और समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। पांच महीने के भीतर दो बच्चों की अचानक मृत्यु ने परिवार को अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक संकट में डाल दिया है। प्रशासन और स्कूल दोनों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत करना होगा।