नगर निगम में 5 साल से एक ही सीट पर जमे 340 कर्मचारी, 2 हजार से ज्यादा फाइलें पेंडिंग; कामकाज पर पड़ रहा असर
नगर निगम में कर्मचारियों की लंबे समय से एक ही सीट पर तैनाती और फाइलों के लगातार लंबित रहने का मामला प्रशासनिक कामकाज पर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, निगम में करीब 340 कर्मचारी ऐसे हैं, जो पिछले पांच साल से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं। वहीं, 2 हजार से ज्यादा फाइलें लंबित बताई जा रही हैं। ऐसे में फाइलों के निस्तारण में देरी होने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
लंबे समय से एक ही सीट पर तैनाती
सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की समय-समय पर सीट बदलने या जिम्मेदारियों में फेरबदल करने का उद्देश्य कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना और प्रशासनिक प्रक्रिया को सुचारु करना होता है। लेकिन नगर निगम में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लंबे समय से एक ही सीट पर बने रहने की जानकारी सामने आने के बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।
एक ही शाखा या सीट पर लंबे समय तक काम करने से कर्मचारियों को संबंधित कार्यों का अनुभव जरूर मिलता है, लेकिन समय पर रोटेशन नहीं होने पर कामकाज की निगरानी, जिम्मेदारियों के बंटवारे और फाइलों की गति पर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, कर्मचारियों की तैनाती और फाइलों के लंबित रहने के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विभागीय आंकड़ों और जांच की जरूरत होगी।
2 हजार से ज्यादा फाइलें लंबित
नगर निगम में 2 हजार से अधिक फाइलें लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। फाइलें लंबित रहने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें दस्तावेजों की कमी, संबंधित शाखाओं से रिपोर्ट नहीं मिलना, अधिकारियों की मंजूरी में देरी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी शामिल हो सकती है।फाइलों के निस्तारण में देरी का असर आम नागरिकों के काम पर पड़ सकता है। संपत्ति, निर्माण अनुमति, नामांतरण, सफाई व्यवस्था और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े मामलों में समय पर निर्णय नहीं होने से लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। हालांकि, लंबित फाइलों में किस तरह के मामले शामिल हैं और कितनी फाइलें निर्धारित समय-सीमा से बाहर हैं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना जरूरी है।
सीटों में बदलाव और जवाबदेही पर नजर
इस स्थिति में कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा, लंबित फाइलों की श्रेणीवार सूची तैयार करना और प्रत्येक मामले के निस्तारण की समय-सीमा तय करना अहम कदम हो सकते हैं। साथ ही, जिन फाइलों में लंबे समय से कार्रवाई नहीं हुई है, उनकी जिम्मेदारी संबंधित शाखा और अधिकारी के स्तर पर तय की जा सकती है।
नगर निगम प्रशासन के सामने चुनौती केवल लंबित फाइलों की संख्या घटाने की नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न होने देने की भी है। इसके लिए नियमित समीक्षा बैठकें, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
फिलहाल, 340 कर्मचारियों की तैनाती और 2 हजार से अधिक लंबित फाइलों से जुड़े मामले में विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। संबंधित आंकड़ों, कर्मचारियों के सीटवार विवरण और लंबित फाइलों के कारणों की आधिकारिक पुष्टि से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।