राजस्थान पंचायत चुनाव, वीडियो में देंखे पूर्व मंत्री जाहिदा खान के बेटे-बेटी समेत 322 पूर्व जनप्रतिनिधि नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। प्रदेश में पूर्व सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रधान सहित 322 पूर्व जनप्रतिनिधि इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पंचायतीराज विभाग की ओर से तैयार अयोग्य घोषित जनप्रतिनिधियों की सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई थी। विभाग ने इन लोगों को पांच साल तक चुनाव लड़ने से रोकने की सिफारिश की थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। इस सूची में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहीं जाहिदा खान के बेटे और बेटी के नाम भी शामिल बताए गए हैं। दोनों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति के मामले में अयोग्यता का आधार और संबंधित आदेश अलग-अलग हो सकते हैं।
पंचायतीराज विभाग ने आयोग को भेजी सूची
पंचायतीराज विभाग ने उन पूर्व जनप्रतिनिधियों की सूची तैयार की है, जिन्हें नियमों के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा गया है। विभाग की ओर से यह सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई, ताकि पंचायत चुनाव के दौरान इन व्यक्तियों की पात्रता की जांच की जा सके और नियमों के अनुसार कार्रवाई हो।राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा के मुताबिक, पंचायतीराज विभाग से अयोग्य घोषित किए गए लोगों की सूची मिल गई है। उन्होंने बताया कि आयोग ऐसे व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाएगा, जिन्हें नियमानुसार अयोग्य ठहराया गया है। सूची सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी भेज दी गई है।
वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई
पंचायतीराज विभाग के सचिव जोगाराम ने बताया कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में संबंधित जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उनके अनुसार, जिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे मामले होते हैं, उनमें संभागीय आयुक्त नियमों के तहत उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर सकते हैं।विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय जवाबदेही और प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अयोग्यता की अवधि और लागू प्रावधान संबंधित आदेशों के आधार पर तय होते हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी गई सूची
राज्य निर्वाचन आयोग ने सूची जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेज दी है। इससे पंचायत चुनाव के लिए नामांकन और उम्मीदवारों की पात्रता की जांच के दौरान संबंधित जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। जिन लोगों पर रोक लागू होगी, वे निर्धारित अवधि में चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।पंचायत चुनाव से पहले सामने आई इस सूची का असर कई स्थानीय क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की चुनाव लड़ने की पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित अयोग्यता आदेश और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा।
चुनाव से पहले पात्रता की जांच अहम
पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की पात्रता सुनिश्चित करना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में जिला निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि नामांकन के दौरान आयोग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची और संबंधित आदेशों के आधार पर जांच की जाए।इस मामले में 322 पूर्व जनप्रतिनिधियों पर रोक की खबर के बीच यह देखना अहम होगा कि संबंधित अयोग्यता आदेशों में किन प्रावधानों का उल्लेख है और वे किस अवधि तक प्रभावी रहेंगे।