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CEC ज्ञानेश कुमार पर 20 साल पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों की होगी जांच, PWD सचिव रहते 2 करोड़ रुपए मांगने का दावा

 

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरलम सरकार ने उनके खिलाफ करीब 20 साल पुराने कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। मामला उस समय का है, जब ज्ञानेश कुमार केरलम में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे। एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण परियोजना के बिलों का भुगतान जारी करने के बदले उनसे 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।

4 नवंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस शिकायत की जांच के लिए सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को निर्देश दिए हैं। यह मामला करीब दो दशक पुरानी केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) सड़क परियोजना से जुड़ा है।

17 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़ा है मामला

शिकायतकर्ता ठेकेदार साजन का आरोप है कि उस समय परियोजना से जुड़े करीब 17 करोड़ रुपए के बिल इंजीनियरों की मंजूरी के बावजूद रोक दिए गए थे। उनका दावा है कि तत्कालीन PWD सचिव ज्ञानेश कुमार ने भुगतान जारी करने के लिए 2 करोड़ रुपए की मांग की थी।

यह परियोजना PATI-BEL कंसोर्टियम के तहत संचालित थी, जिसमें मलेशियाई कंपनी भी शामिल थी। शिकायत के अनुसार, भुगतान में देरी के कारण कंपनी और उससे जुड़े ठेकेदारों एवं कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और जांच में अभी साबित नहीं हुए हैं।

2006 में भी हुई थी विजिलेंस जांच

इस मामले में पहले भी वर्ष 2006-07 के दौरान विजिलेंस जांच शुरू की गई थी। उस समय PWD के कई कार्यों में टेंडर प्रक्रिया और भुगतान को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। जांच में कुल आठ तरह के आरोपों की पड़ताल की गई थी। इनमें ठेकेदारों को अधिक भुगतान, टेंडर राशि में बदलाव और अधिकारियों द्वारा बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने जैसे आरोप शामिल थे।

हालांकि, पहले की जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके थे। वर्ष 2012 में विजिलेंस ने कई मामलों को 'मिस्टेक ऑफ फैक्ट' बताते हुए बंद करने की रिपोर्ट दी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। अब नई शिकायत के आधार पर पुराने रिकॉर्ड की दोबारा पड़ताल की जाएगी।

कांग्रेस सरकार में फिर खुला पुराना मामला

केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार के सत्ता में आने के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की शिकायत के आधार पर विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि पुराने दस्तावेजों और शिकायतों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी।

इस पूरे मामले का संबंध उस समय से भी है, जब परियोजना से जुड़े मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की वर्ष 2006 में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परियोजना के भुगतान और कथित भ्रष्टाचार को लेकर विवाद सामने आया था।

SIR विवाद के बीच जांच ने बढ़ाई चर्चा

ज्ञानेश कुमार फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी राजनीतिक माहौल के बीच उनके केरलम में कार्यकाल से जुड़े पुराने आरोपों की जांच दोबारा शुरू होने का मामला सामने आया है।

हालांकि, दोनों मामलों को अलग-अलग रखना जरूरी है। फिलहाल 2 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। विजिलेंस जांच में पुराने दस्तावेजों और नई शिकायत की पड़ताल के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।